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जब 1996 में गिरी थी वाजपेयी सरकार, तब संसद में सुषमा स्वराज ने दिया था ये जोरदार भाषण

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 07, 2019 06:05 am IST,  Updated : Aug 07, 2019 06:21 am IST

अपने लंबे राजनीतिक करियर में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कई यादगार भाषण दिए, जिनका तमाम मौकों पर जिक्र होता रहा है।

Sushma Swaraj- India TV Hindi
Sushma Swaraj (File Photo)

नई दिल्ली: अपने लंबे राजनीतिक करियर में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कई यादगार भाषण दिए, जिनका तमाम मौकों पर जिक्र होता रहा है। ऐसा ही एक भाषण उन्होंने संसद में तब दिया था जब 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरी और उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया। वो तारीख 11.06.1996 थी, जब संसद में सुषमा स्वराज ने भाषण दिया था। उस भाषण के कुछ अंश नीचे लिखे हैं, पढ़िए-

“मैं यहां विश्वासमत का विरोध करने के लिए खड़ी हुई हूं। अध्यक्ष जी, ये इतिहास में पहली बार नहीं हुआ है, जब राज्य का सही अधिकारी राज्याधिकार से वंचित कर दिया गया हो। त्रेता में यही घटना राम के साथ घटी थी। राजतिलक करते-करते वनवास दे दिया गया था। द्वापर में यही घटना धर्मराज युद्धिष्ठिर के साथ घटी थी, जब धुर्त शकुनी की दुष्ट चालों ने राज्य के अधिकारी को राज्य से बाहर कर दिया था। 

अध्यक्ष जी, जब एक मंथरा और एक शकुनी, राम और युद्धिष्ठिर जैसे महापुरुषों को सत्ता से बाहर कर सकते हैं तो हमारे खिलाफ तो कितनी मंथराएं और कितने शकुनी सक्रिय हैं। हम राज्य में बने कैसे रह सकते थे? अध्यक्ष जी, शायद रामराज और स्वराज की नियति यही है कि वो एक बड़े झटके के बाद मिलता है। और इसीलिए मैं पूरे विश्वास से कहना चाहती हूं कि जिस दिन 28 तारीख को दोपहर मेरे आदरणीय नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने इस सदन में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा की थी, उस दिन हिन्दुस्तान में रामराज की भूमिका तैयार हो गई थी। हिंदुस्तान में उस दिन स्वराज की नीव पड़ गई थी।

अध्यक्ष जी, हम सांप्रदायिक हैं। हां, हम सांप्रदायिक हैं क्योंकि हम वंदे मातरम् गाने की वकालत करते हैं। हम सांप्रदायिक हैं क्योंकि हम राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए लड़ते हैं। हम सांप्रदायिक हैं क्योंकि हम धारा 370 को खत्म करने की मांग करते हैं। हम सांप्रदायिक हैं क्योंकि हम हिंदुस्तान में गो रक्षा की वकालत करते हैं। हां, अध्यक्ष जी हम सांप्रदायिक हैं क्योंकि हम हिंदुस्तान में समान नागरिक संहिता बनाने की बात करते हैं। अध्यक्ष जी ये सब लोग हैं, ये धर्म निर्पेश हैं, दिल्ली की सड़कों पर 3000 सिखों का कत्ल-ए-आम करने वाले।”

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