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जानिये आखिर क्या होता है क्रायोजेनिक इंजन '

नई दिल्ली: भारत को कई दशकों तक जिस तकनीक से दूर रखे जाने की कोशिशें होती रहीं, उसी बेहद जटिल तकनीक में देश के वैज्ञानिकों ने महारत हासिल कर ली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान

India TV News Desk
Published : Jul 21, 2015 07:40 am IST, Updated : Jul 21, 2015 07:56 am IST

‘क्रायो’ यूनानी शब्द ‘क्रायोस’ से बना है, जिसका अर्थ ‘बर्फ जैसा ठण्डा’ होता है।  क्रायोजेनिक तकनीक का मुख्य प्रयोग रॉकेटों में किया जाता है, जहाँ ईधनों को क्रायोजेनिक तकनीक से तरल अवस्था में प्राप्त कर लिया जाता है। इस तकनीक में द्रव हाइड्रोजन एवं द्रव ऑक्सीजन का प्रयोग किया जाता है।

बेहद कम ताप उत्पन्न करने का विज्ञान क्रायोजेनिक्स कहलाता है ! प्रायः 0 डिग्री सेल्सियस से माइनस 253 डिग्री सेल्सियस तापमान को क्रायोजेनिक कहते है।

इसी तापमान का उपयोग करने वाली प्रक्रियायों और उपायों का क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है ।

दरअसल, क्रायोजेनिक इंजन में अत्यन्त ठंडी बाष्पीकृत गैसों को इंधन और आक्सीकारक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है ।

ठोस ईंधन की अपेक्षा यह कई गुना शक्तिशाली सिद्ध होते हैं और रॉकेट को बूस्ट देते हैं। विशेषकर लंबी दूरी और भारी रॉकेटों के लिए यह तकनीक आवश्यक होती है।

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