आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काला मोतिया आंखों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। काला मोतिया से जूझ रहे मरीजों की ऑप्टिक नर्व बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है और अगर समय रहते इस बीमारी को ट्रीट न किया जाए, तो मरीज हमेशा के लिए अपनी आंखों की रोशनी खो सकता है। जनवरी को काला मोतिया जागरूकता माह यानी ग्लूकोमा अवेयरनेस मन्थ के तौर पर भी जाना जाता है। आइए इस मौके पर आपको ग्लूकोमा के लक्षणों के बारे में बताते हैं।
गौर करने वाले लक्षण- ग्लूकोमा के सबसे कॉमन लक्षणों में धुंधली दृष्टि का लक्षण शामिल होता है। आपको पढ़ते समय या गाड़ी चलाते समय दिक्कत महसूस हो रही हो, तो हो सकता है कि आप काला मोतिया की चपेट में आ गए हों। लाइट सेंसिटिविटी, ये लक्षण भी इसी गंभीर बीमारी की तरफ इशारा कर सकता है। ग्लूकोमा से जूझ रहे मरीजों को अक्सर चीजों का रंग भूरा या फिर पीला दिखाई देने लगता है।
हो जाएं सावधान- काला मोतिया के शुरुआती लक्षण अक्सर पता नहीं चलते हैं। यही वजह है कि इस बीमारी को दृष्टि का मूक चोर भी कहा जाता है। लेकिन जैसे ही आपको बताए गए काला मोतिया के लक्षण महसूस हों या फिर आपकी दृष्टि में किसी भी तरह का बदलाव हो, तो तुरंत सावधान हो जाएं और डॉक्टर यानी आई स्पेशलिस्ट से अपनी जांच करवा लें।
भारी पड़ सकती है लापरवाही- हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक आपको 40 की उम्र के बाद अपनी आंखों का रेगुलर चेकअप करवाते रहना चाहिए। अगर आपके परिवार के किसी सदस्य को काला मोतिया हो चुका है, तो आपको चेकअप करवाने को लेकर कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जल्दी ग्लूकोमा के लक्षणों को डिटेक्ट कर इसका ट्रीटमेंट शुरु करवाना बेहद जरूरी होता है। दरअसल, ग्लूकोमा को ठीक नहीं किया जा सकता बल्कि इसे आगे बढ़ने से यानी आंखों को और ज्यादा क्षति पहुंचने से रोका जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।