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16 साल से लंबित एसिड अटैक ट्रायल पर फूटा CJI सूर्यकांत का गुस्सा कहा-'शर्मनाक, कानूनी सिस्टम का मजाक बना रखा है'

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Shakti Singh
 Published : Dec 04, 2025 12:30 pm IST,  Updated : Dec 04, 2025 12:47 pm IST

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि 2009 का ट्रायल अब तक चल रहा है। यह शर्म की बात है। अगर दिल्ली ऐसे मामलों को नहीं संभाल पाएगी तो फिर कौन करेगा।

Surya Kant- India TV Hindi
सीजेआई सूर्यकांत Image Source : PTI

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 16 साल से लंबित मामले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि 2009 का ट्रायल अब तक चल रहा है। यह शर्म की बात है। 16 साल से लंबित एसिड अटैक ट्रायल पर सीजेआई सूर्यकांत बेहद नाराज हुए। उन्होंने इसे शर्मनाक करार देते हुए कहा कि कानूनी सिस्टम का मजाक बना रखा है। सुप्रीम कोर्ट में एसिड अटैक के एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने 2009 से लंबित ट्रायल पर कड़ी नाराजगी जताई।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “क्या मजाक है ये हमारे कानूनी सिस्टम का। यह तो शर्म की बात है। 2009 का ट्रायल आज भी चल रहा है। अगर राष्ट्रीय राजधानी (दिल्ली) ही ऐसे मामलों को संभाल नहीं पा रही, तो फिर कौन करेगा?”

सभी हाई कोर्ट से एसिड अटैक की रिपोर्ट मांगी

सीजेआई ने कहा कि देशभर में एसिड अटैक मामलों की स्थिति जानना जरूरी है और इस पर अहम निर्देश जारी किए। उनके आदेश में देश के सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल्स से एसिड अटैक पीड़ितों के लंबित ट्रायल की पूरी जानकारी मांगी गई। इसके साथ ही हर लंबित केस की स्टेज, देरी का कारण और अब तक की प्रोग्रेस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजने के निर्देश दिए गए। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में देरी “अस्वीकार्य” है और ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

हर साल 200 से ज्यादा महिलाएं बनती हैं शिकार

भारत में हर साल 200 से ज्यादा महिलाएं एसिड अटैक का शिकार बनती हैं। यह सरकारी आंकड़ा है, लेकिन असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, ये मामले दर्ज किए जाते हैं, लेकिन कई अनदेखे रह जाते हैं।2023 के एनसीआरबी डेटा के आधार पर देश में 207 मामले दर्ज किए गए थे। यह संख्या 2022 के 202 मामलों से थोड़ी अधिक है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 124 के तहत एसिड अटैक के आरोपियों को न्यूनतम 10 वर्ष की सजा का प्रावधान है। इसमें अधिकतम उम्रकैद हो सकती है।

2017 से एसिड अटैक के मामले

 

 

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