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दिल्ली: वक्फ की बैठक खत्म, JPC ने बिल को 11 के मुकाबले 14 वोट से स्वीकार कर लिया

 Reported By: Shoaib Raza Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Jan 29, 2025 11:10 am IST,  Updated : Jan 29, 2025 11:51 am IST

वक्फ को लेकर हुई बैठक खत्म हो गई है। इसको लेकर अससुद्दीन ओवैसी का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होने कहा है कि सरकार के पास बहुमत है तो उन्होंने इस अमेंडमेंट को पास करवा लिया। अब ये संसद में जाएगा लेकिन हम संसद में लड़ाई लड़ेंगे।

Delhi Waqf - India TV Hindi
वक्फ की बैठक खत्म Image Source : INDIA TV

नई दिल्ली: वक्फ को लेकर हुई बैठक खत्म हो गई है। वक्फ जेपीसी ने बिल को 11 के मुकाबले 14 वोट से स्वीकार कर लिया है। विपक्षी सदस्यों को आज शाम 4 बजे तक अपना असहमति नोट देने के लिए कहा गया है।

ओवैसी का बयान आया सामने

इस मामले में अससुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, 'आज तो ड्राफ्ट रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया। 14 वोट इसके पक्ष में थे और 11 वोट विपक्ष में थे। कल रात में 650 पेज के ऊपर रिपोर्ट दी गई, कैसे किसी को हम इतनी जल्दी पढ़कर देंगे। हम हमारी पार्टी की तरफ से असहमति नोट दे रहे हैं और हमारा मानना है कि मोदी सरकार जो अमेंडमेंट लेकर आई है वह प्रॉपर्टी को बचाने के लिए नहीं है बल्कि बर्बाद करने के लिए है। वक्फ मुसलमानों के लिए इबादत है, उसे छीना जाना चाहते हैं।'

अससुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'हमारा मानना है कि मोदी सरकार वक्फ प्रॉपर्टी को मुसलमानों से छीनना चाहती है। सरकार के पास बहुमत है तो उन्होंने इस अमेंडमेंट को पास करवा लिया। अब ये संसद में जाएगा लेकिन हम संसद में लड़ाई लड़ेंगे। जरूरत पड़ेगी तो हम बाहर भी इसका विरोध करेंगे।'

बता दें कि इससे पहले वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर चर्चा कर रही संसद की संयुक्त समिति (JPC) ने सत्तारूढ़ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सदस्यों द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों को सोमवार को स्वीकार कर लिया  था और विपक्षी सदस्यों के संशोधन प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने बैठक के बाद बताया था कि समिति द्वारा स्वीकार किए गए संशोधनों से कानून बेहतर और प्रभावी होगा। हालांकि, विपक्षी सांसदों ने बैठक की कार्यवाही की निंदा की और पाल पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ‘पलटने’ का आरोप लगाया।

तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा था, ‘‘यह हास्यास्पद कवायद थी। हमारी बात नहीं सुनी गई। जगदंबिका पाल ने तानाशाही तरीके से काम किया है।’’ वहीं, पाल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक थी और बहुमत की राय को स्वीकार किया गया है।

 

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