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गलती से दांत निगलना पड़ा भारी, खाने की नली में फंसा; जानें कैसे मौत के मुंह से लौटा वापस

 Edited By: Amar Deep @amardeepmau
 Published : Apr 03, 2026 08:58 pm IST,  Updated : Apr 03, 2026 08:58 pm IST

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में एक व्यक्ति की खाने की नली में फंसे नकली दांत को निकाला गया। व्यक्ति ने गलती से नकली दांत को निगल लिया था, जो उसके भोजन की नली में जाकर फंस गया था।

खाने की नली में फंसा दांत। - India TV Hindi
खाने की नली में फंसा दांत। Image Source : PEXELS/REPRESENTATIVE IMAGE

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने गलती से नकली दांत निगल लिया, जो भोजन की नली में फंस गया। हालांकि सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों ने लेजर कटर की मदद से एक उन्नत एंडोस्कोपिक प्रक्रिया का उपयोग करते हुए नकली दांत को सफलतापूर्वक निकाल दिया। मरीज को एक बड़ी सर्जरी से बचने में मदद मिली।

गलती से निगल लिया नकली दांत

डॉक्टरों ने बताया कि मरीज जब अस्पताल लाया गया, तब उसे सांस लेने में तकलीफ, गले में दर्द और निगलने में कठिनाई की समस्या थी। उन्होंने बताया कि उसने गलती से अपना नकली दांत निगल लिया था जो खाने की नली और सांस नली के मिलने की जगह के ठीक नीचे ऊपरी 'इसोफैगस' (ग्रासनली) में फंस गया था। उन्होंने बताया कि उसे सीने में भी काफी तकलीफ हो रही थी। 

बाहर निकालना नहीं था आसान

इमेजिंग अध्ययनों से पुष्टि हुई कि नकली दांत भोजन नली के एक नाजुक बिंदु पर मजबूती से फंसा हुआ था, जहां इससे ग्रासनली की परत के फटने का उच्च जोखिम था। इस मामले को बेहद चुनौतीपूर्ण बताते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर, ILGPS के अध्यक्ष अनिल अरोरा ने कहा कि इस मामले में पारंपरिक निष्कासन विधियों से चोट लगने का काफी जोखिम था। 

लेजर बीम से टुकड़ों में की कटिंग

अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया, "सटीक एंडोस्कोपिक मार्गदर्शन के तहत डॉक्टरों ने लेजर बीम का उपयोग करके ग्रासनली के अंदर फंसे हुए नकली दांत को छोटे-छोटे टुकड़ों में सावधानीपूर्वक तोड़ दिया ताकि उसे ग्रासनली के अंदरूनी भाग से अलग किया जा सके।" उन्होंने बताया कि इसके बाद ऊपरी ग्रासनली में एक सुरक्षात्मक ट्यूब डाली गई ताकि आसपास के ऊतकों को टूटे हुए दांत के नुकीले किनारों से बचाया जा सके और प्रत्येक टुकड़े को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके। 

बिना ओपन सर्जरी के निकाला बाहर

वहीं गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के सलाहकार श्रीहरि अनिखिंदी ने कहा कि लेजर-सहायता प्राप्त तकनीक से बिना ओपन सर्जरी के बाहरी वस्तु को निकालना संभव हो गया है। डाक्टरों ने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद मरीज अब पूरी तरह ठीक है। 

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