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'कम से कम 3 संतान हो...', संघ प्रमुख मोहन भागवत की सलाह, बताया हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष कैसे खत्म होगा

 Published : Aug 28, 2025 07:24 pm IST,  Updated : Aug 28, 2025 11:54 pm IST

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भारत के लोगों को कम से कम 3 संतान पैदा करने की सलाह दी है। मोहन भागवत ने इस बारे में भी बात की है कि हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष कैसे खत्म होगा।

Mohan bhagwat 3 childs- India TV Hindi
मोहन भागवत ने 3 संतान पर दिया जोर। Image Source : PTI

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने डेमोग्राफी समेत कई मुद्दों पर बात की है। भागवत ने कहा है कि "डेमोग्राफी की चिंता सिर्फ भारत को नहीं सभी देशों को रहती है। लोभ लालच से धर्मांतरण रोकना है। घुसपैठ को रोकना चाहिए। सरकार कुछ प्रयास कर रही है। समाज को करना चाहिए कि अपने देश के लोगों को रोजगार दें। मुसलमान को देना है तो अपने देश के मुसलमानों को दें। अवैध को रोकना चाहिए और रोजगार नहीं देना चाहिए।"

3 बच्चे पैदा करें देश के लोग

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भारत के लोगों को 3 बच्चे पैदा करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा- "जन्मदर 3 से कम हो तो लुप्त हो जाता है। डॉक्टर कहते हैं कि 3 संतान होना अच्छा होता है। भारत वर्ष के प्रत्येक नागरिक को देखना चाहिए कि अपने घर में 3 संतान हो। इससे ज्यादा आगे नहीं बढना चाहिए।" उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय असंतुलन के प्रमुख कारण धर्मांतरण और अवैध प्रवास हैं।

हिन्दू मुस्लिम संघर्ष पर बोले भागवत

मोहन भागवत ने कहा- "हिन्दू मुस्लिम संघर्ष खत्म होगा जब दोनों तरफ विश्वास होगा कि हम एक हैं, भले पूजा पद्धति अलग हो। हिन्दू, हिन्दवी, भारतीय सब एक ही हैं। आक्रांताओं के नाम पर नामकरण नहीं होना चाहिए लेकिन शहीद हमीद, कलाम पर होना चाहिए। हिंदू सोच यह नहीं कहती कि इस्लाम यहां नहीं रहेगा। धर्म व्यक्तिगत पसंद का विषय है, इसमें किसी प्रकार का प्रलोभन या बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। जब सभी एक हैं, तो हिंदू-मुस्लिम एकता की बात क्यों करें, हम सभी भारतीय हैं।"

RSS हिंसा में विश्वास करता तो...- मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि यह कहना गलत है कि आरएसएस ने भारत के विभाजन का विरोध नहीं किया, हमने इसका विरोध किया, लेकिन उस समय आरएसएस पर्याप्त मजबूत नहीं था। अखंड भारत जीवन का एक सत्य है, हमें यह समझना चाहिए कि हमारी संस्कृति और पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस हिंसा में विश्वास करता तो वह एक भूमिगत संगठन होता।

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