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भारत ने ईरान के युद्धपोत IRIS लावन को क्यों दी शरण? विदेश मंत्री जयशंकर ने बताई पूरी बात

 Published : Mar 07, 2026 02:19 pm IST,  Updated : Mar 07, 2026 02:31 pm IST

एस. जयशंकर ने रायसीना डायलॉग में कहा कि भारत ने मानवीय आधार पर IRIS लावन को कोच्चि में शरण दी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय तनाव के बीच जहाज के 183 नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत यह फैसला लिया।

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर। Image Source : PTI

नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर ने भारत के उस फैसले का बचाव किया है, जिसमें ईरान के युद्धपोत IRIS लावन को कोच्चि में डॉक करने की इजाजत दी गई है। रायसीना डायलॉग 2026 में बोलते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह से मानवीय कर्तव्य बताया और कहा कि यह निर्णय बिल्कुल सही था। बता दें कि ईरानी जहाज भारत के इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और MILAN 2026 (15-25 फरवरी) में हिस्सा लेने आए थे, लेकिन क्षेत्र में तनाव बढ़ने से स्थिति बिगड़ गई। अमेरिकी नौसेना ने इस बीच एक ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को श्रीलंका के दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय जल में टॉरपीडो से डुबो दिया, जिसमें कई नाविक मारे गए थे।

'कोच्चि में सुरक्षित हैं IRIS लावन के नाविक'

श्रीलंका के मैरिटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी कि MRCC ने जहाज के डिस्ट्रेस सिग्नल पर कार्रवाई की और भारतीय नौसेना ने भी राहत एवं बचाव कार्य में मदद की जिससे कई नाविकों की जान बच गई। इसी बीच, IRIS लावन, जो फ्लीट रिव्यू में शामिल था, ने तकनीकी खराबी की वजह से भारत से मदद मांगी। ईरान ने 28 फरवरी को भारत से अनुरोध किया कि इस जहाज को कोच्चि में शरण दी जाए। भारत ने 1 मार्च को इजाजत दे दी। जहाज कुछ दिनों बाद कोच्चि पहुंचा और 4 मार्च को डॉक हो गया। इसमें 183 क्रू मेंबर थे, जिनमें युवा कैडेट भी शामिल थे। अब वे कोच्चि में पूरी तरह सुरक्षित हैं।

'मुझे लगता है कि हमने सही काम किया'

जयशंकर ने रायसीना डायलॉग में कहा, 'वे फ्लीट रिव्यू के लिए आ रहे थे, लेकिन घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए। हमने मानवता के नजरिए से देखा। मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।' उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करते हुए कहा कि यह निर्णय मानवीय था, भले ही भू-राजनीतिक तनाव के चलते हालात खराब हों। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर हो रहे हंगामे को खारिज करते हुए हिंद महासागर की हकीकत बताई। उन्होंने कहा कि डिएगो गार्सिया पर 50 साल से अमेरिकी बेस है, जिबूती में 2000 से विदेशी बेस हैं, और हम्बनटोटा हाल ही में चर्चा में आया है।

'हमारे साथ काम करेंगे, तो फायदा मिलेगा'

जयशंकर ने कहा कि भारत पिछले 10 साल से क्षेत्र में व्यापार और कनेक्टिविटी को बहाल करने के लिए 'इकोसिस्टम' बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने संसाधन, प्रोजेक्ट्स और प्रतिबद्धताओं को लेकर कड़ी मेहनत की है, और भारत के बढ़ते कदम से क्षेत्रीय पार्टनरों को फायदा होगा। उन्होंने कहा, 'जो हमारे साथ काम करेंगे, उन्हें ज्यादा फायदा मिलेगा। भारत का उदय हमारी ताकत से तय होगा, दूसरों की गलतियों से नहीं।' विदेश मंत्री ने मर्चेंट नेवी के जोखिम पर जोर देते हुए कहा कि जंग के बीच कई जहाजों पर भारतीय क्रू मौजूद हैं, और खाड़ी में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत उनकी सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देता है।

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