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भारत के न्यूक्लियर एनर्जी बिल में US को दिलचस्पी, जानें अमेरिकी विदेश मंत्री-जयशंकर की बात से चीन को क्यों लगेगी मिर्च?

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jan 14, 2026 08:30 am IST,  Updated : Jan 14, 2026 08:36 am IST

भारत की संसद में पास हुए न्यूक्लियर एनर्जी बिल, 2025 में अमेरिका को इंटरेस्ट आ गया है, इसको लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और एस. जयशंकर की बातचीत हुई। साथ ही, हिंद-प्रशांत को लेकर भी चर्चा हुई जो चीन की बेचैनी बढ़ा सकती है।

India Nuclear Energy Bill 2025- India TV Hindi
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के बीच हुई बातचीत। Image Source : AP (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: भारत की संसद में हाल में पास हुए न्यूक्लियर एनर्जी बिल में अमेरिका को इंटरेस्ट आ गया है। इसको लेकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच लंबी बातचीत हुई है। इसमें Civil Nuclear Cooperation को मजबूत करने पर चर्चा हुई। साथ ही इंडो-पैसिफिक के क्षेत्र पर भी दोनों के बीच वार्ता हुई, जिससे चीन को मिर्च लगना तय है। इस आर्टिकल में जानिए रूबियों को एस. जयशंकर के बीच में क्या-क्या बात हुई?

न्यूक्लियर एनर्जी बिल में अमेरिका को आई रुचि

प्रधान उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट के बयान के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात की और नए साल की शुभकामनाएं दीं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Bill, 2025 पास करने पर बधाई दी। उन्होंने अमेरिका-भारत के Civil Nuclear Cooperation को मजबूत करने, अमेरिकी कंपनियों के लिए मौकों का विस्तार करने, साझा ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और क्रिटिकल मिनिरल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए इंटरेस्ट जताया।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर क्या बात हुई?

इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो और एस. जयशंकर ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने में रुचि पर चर्चा की। साथ ही, क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी उन्होंने अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर अमेरिका और भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि भी की।

न्यूक्लियर एनर्जी बिल क्या है?

जान लें कि न्यूक्लियर एनर्जी बिल को 'शांति बिल' के नाम से भी जाना जाता है। भारत के न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में बड़ा सुधार लाने वाला कानून है, जो 2025 में पारित हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर एनर्जी प्रोडक्शन में शामिल करना है। भारत के क्लीन एनर्जी गोल्स को पूरा करने के लिए प्राइवेट और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।

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