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इंडियन आर्मी ने अमेरिका को दिलाई 1971 के जंग की याद, 'अंकल सैम' की दोहरी नीति पर दिखाया आईना

 Published : Aug 05, 2025 07:28 pm IST,  Updated : Aug 05, 2025 07:33 pm IST

रूस से तेल खरीद पर ट्रंप की धमकी के जवाब में भारत ने 1971 के युद्ध के दौरान अमेरिका की भूमिका याद दिला दी। सेना ने अखबार की पुरानी कटिंग शेयर कर अमेरिका की दोहरी नीति पर निशाना साधा।

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भारतीय सेना ने अखबार की पुरानी कटिंग शेयर करके अमेरिका को उसकी दोहरी नीति याद दिलाई है। Image Source : X.COM/EASTERNCOMD

नई दिल्ली: रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद भारत ने इतिहास के पन्ने पलटकर करारा जवाब देते हुए आईना दिखाया है। भारतीय सेना की ईस्टर्न कमान (Eastern Command) ने एक अखबार की 1971 के युद्ध से जुड़ी एक पुरानी कटिंग शेयर करते हुए अमेरिका को उसकी दोहरी नीति याद दिला दी। इस पोस्ट में 5 अगस्त 1971 की एक रिपोर्ट दिखाई गई जिसमें साफ लिखा है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को 1954 से लेकर उस वक्त तक 2 अरब डॉलर के हथियार दिए थे। उस समय भारत के रक्षा उत्पादन मंत्री वी.सी. शुक्ला ने संसद में कहा था कि जब फ्रांस और सोवियत संघ ने पाकिस्तान को हथियार देने से इनकार कर दिया, तब भी अमेरिका पाकिस्तान को लगातार हथियार भेजता रहा।

पुरानी कटिंग को शेयर करने की टाइमिंग भी अहम

वी. सी. शुक्ला ने नाटो (NATO) देशों पर भी सवाल उठाते हुए कहा था कि वे बांग्लादेश में पाकिस्तान की ज़्यादतियों को नजरअंदाज़ कर रहे हैं। उस रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान ने 1971 का युद्ध अमेरिकी और चीनी हथियारों से लड़ा। इस पुरानी कटिंग को शेयर करने की टाइमिंग भी अहम है। ये पोस्ट उस वक्त आई है जब ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी है कि अगर उसने रूस से तेल खरीदना जारी रखा, तो वह भारतीय सामानों पर मौजूदा 25% से भी ज्यादा टैक्स लगा देंगे। भारत ने इस पर सख्त लहजे में जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि अमेरिका खुद यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में रूस से तेल खरीद को बढ़ावा दे रहा था। ऐसे में भारत की जरूरतों पर सवाल उठाना दोहरा मापदंड है।

राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगा भारत

भारत ने ये भी कहा कि तेल खरीद आज की जरूरत है और यह फैसला ग्लोबल मार्केट की हालत देखकर लिया गया है। इसके अलावा, जिन देशों ने भारत की आलोचना की, वे खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं जबकि उनके लिए यह कोई मजबूरी नहीं है। भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध की याद दिलाकर यह साफ कर दिया है कि जब बात राष्ट्रीय हितों की हो, तो भारत पीछे हटने वाला नहीं है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने फैसले खुद करेगा, चाहे वो रूस से तेल खरीदना हो या किसी और देश से व्यापार।

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