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जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आ सकता है महाभियोग प्रस्ताव, 150 सांसदों ने किया हस्ताक्षर- सूत्र

 Reported By: Devendra Parashar Edited By: Subhash Kumar
 Published : Jul 21, 2025 02:21 pm IST,  Updated : Jul 21, 2025 02:21 pm IST

कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद के मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, 150 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया है।

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जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आ सकता है महाभियोग प्रस्ताव। Image Source : PTI

जस्टिस यशवंत वर्मा मुश्किलों में घिरते जा रहे हैं। आपको बता दें कि संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार 21 जुलाई से हो गई है। अब माना जा रहा है कि सरकार संसद के वर्तमान मानसून सत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव ला सकती है। सूत्रों की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के लिए सभी दलों के सांसदों के हस्ताक्षर लिए गए हैं।

कितने सांसदों ने हस्ताक्षर किया?

अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, छोटे-बड़े सभी दलों के सांसद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, तकरीबन 150 सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया है। सांसदों की ओर से हस्ताक्षर किए जाने के बाद अब इस प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष को दिया जाएगा।

आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

सांसदों द्वारा हस्ताक्षर किए गए प्रस्ताव को स्वीकार करना या नहीं करना लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार में है। प्रस्ताव स्वीकार होने की स्थिति में एक कमेटी बनाई जाएगी, जो एक से तीन महीने में इस मामले में अपनी रिपोर्ट देगी। अगर प्रस्ताव अमल में आया तो शीतकालीन सत्र में ही महाभियोग प्रस्ताव पर सदन की कार्रवाई होगी।

यहां समझें पूरा मामला

इस पूरे विवाद की शुरुआत मार्च 14-15 की रात हुई थी। इस दिन दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगी गई थी। जब आग बुझाने वाली टीम वहां पहुंची तो उन्हें स्टोर रूम से जली हुई 500 रुपये की गड्डियां मिलीं। इसके बाद काफी हंगामा हुआ। फिर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए तीन जजों की इन-हाउस जांच कमेट बनाई। जजों के पैनल ने जस्टिस वर्मा और उनके परिवार को “प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से” कैश रखने का जिम्मेदार ठहराया। पैनल ने कहा कि आग के बाद रातों-रात कैश को हटाया गया और जानबूझकर सबूत नष्ट किए गए थे। जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने इसे भारत की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को महाभियोग की सिफारिश के साथ भेजा था।

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