ओडिशा के मलकानगिरी जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां परंपरा और आस्था के नाम पर किए जा रहे खतरनाक करतब ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। चैत महीने के अंत में हर साल की तरह इस बार भी इलाके के कई गांवों में चड़क पूजा का आयोजन किया गया था। लेकिन इस बार यह परंपरा एक बड़े हादसे में बदल गई।
क्या है मान्यता?
मलकानगिरी जिले के एमवी-72 गांव समेत आसपास के कई गांवों में चड़क पूजा धूमधाम से मनाई जा रही थी। इस पूजा में श्रद्धालु भगवान शिव और मां काली को प्रसन्न करने के लिए खजूर के ऊंचे पेड़ों पर चढ़कर कांटेदार डालों पर घूमते हैं और अपने शरीर को कठिन परीक्षाओं से गुजारते हैं। इसे आस्था और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, लेकिन यह बेहद जोखिम भरा भी होता है।
संतुलन बिगड़ने से गिरा युवक
इसी दौरान एमवी-72 गांव में पूजा के समय एक बड़ा हादसा हो गया। 35 साल के जगदीश साना नाम के युवक खजूर के पेड़ पर चढ़कर करतब दिखा रहे थे। तभी अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह काफी ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें कालीमेला अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई है। पेड़ से गिरने की पूरी घटना वहां मौजूद लोगों के कैमरे में कैद हो गई।
एमवी-80 गांव में भी ऐसा ही हादसा
वहीं, इसी तरह की एक और घटना एमवी-80 गांव में सामने आई। यहां मिहिर मंडल नाम का एक युवक भी चड़क पूजा के दौरान खजूर के पेड़ से गिर गया। हालांकि वह गंभीर रूप से घायल हो गया, लेकिन किस्मत अच्छी रही कि उसकी जान बच गई। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। इन दोनों घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आस्था के नाम पर इस तरह की खतरनाक परंपराओं को जारी रखना सही है? हर साल इस तरह के आयोजन में लोग अपनी जान जोखिम में डालते हैं, लेकिन सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नजर नहीं आते।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि आस्था के साथ-साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
(ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट)
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