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सोमनाथ पर आक्रमण के हजार साल पूरे, PM मोदी ने कहा 'अटूट आस्था के 1000 साल'; जानें और क्या बोले

 Reported By: Devendra Parashar Edited By: Amar Deep
 Published : Jan 05, 2026 09:58 am IST,  Updated : Jan 05, 2026 12:41 pm IST

सोमनाथ पर आक्रमण के 1000 साल पूरे हो गए हैं। पीएम मोदी ने एक आर्टिकल के जरिए देशवासियों के भीतर अटूट आस्था के 1000 साल का जिक्र किया है। उन्होंने अपने लेख में सोमनाथ की गाथा के बारे में भी जानकारी दी है। पीएम मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ जाएंगे।

सोमनाथ पर आक्रमण के 1000 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने लिखा लेख।- India TV Hindi
सोमनाथ पर आक्रमण के 1000 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने लिखा लेख। Image Source : NARENDRAMODI.IN

गुजरात में मौजूद सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर विदेशी आक्रमण के 1000 साल पूरे हो गए हैं। साल 1026 में पहली बार सोमनाथ पर आक्रमण किया गया, जिसके बावजूद आज भी सोमनाथ मंदिर की अडिग खड़ा है। पीएम मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर जाएंगे। वह सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल भी होंगे। सोमनाथ मंदिर में 8 से 11 जनवरी तक कई आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। पीएम मोदी सोमनाथ मंदिर के आक्रमण के 1000 साल पूरे होने पर एक लेख लिखा है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, वर्ष 2026 में आस्था की हमारी तीर्थस्थली सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है! सोमनाथ दरअसल भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है, जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सदैव सर्वोपरि रही है।"

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में उल्लेख

पीएम मोदी ने अपने आलेख में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की महत्ता पर प्रकाश डाला है। पीएम मोदी ने लिखा, "सोमनाथ शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है। ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है...“सौराष्ट्रे सोमनाथं च...यानि ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है। ये इस पवित्र धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता का प्रतीक है।" 

विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना

पीएम मोदी ने सोमवार पर आक्रमण का जिक्र करते हुए लिखा, "दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था। वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया था, इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था।"

पूरे गौरव के साथ खड़ा मंदिर

पीएम मोदी ने लिखा, "सोमनाथ हमला मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल है। फिर भी, एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे।"

सैकड़ों आक्रमणों के निशान

पीएम मोदी ने अपने लेख में लिखा, "इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है। ये बार बार नष्ट किए गए, और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए। पहले की तरह सशक्त। पहले की तरह जीवंत। यही राष्ट्रीय मन है, यही राष्ट्रीय जीवन धारा है। इसका अनुसरण आपको गौरव से भर देता है। इसको छोड़ देने का मतलब है, मृत्यु। इससे अलग हो जाने पर विनाश ही होगा।” ये सर्वविदित है कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया। उन्होंने आगे बढ़कर इस दायित्व के लिए कदम बढ़ाया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। अंततः 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।"

नया इतिहास रचा

PM मोदी ने आगे लिखा, "तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी। लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया। सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख के.एम. मुंशी जी के योगदानों को याद किए बिना अधूरा है। उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी रूप से समर्थन किया था। सोमनाथ पर उनका कार्य, विशेष रूप से उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’, अवश्य पढ़ी जानी चाहिए।"

अनादि काल से लोगों को जोड़ रहा सोमनाथ

सोमनाथ का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, "अनादि काल से सोमनाथ जीवन के हर क्षेत्र के लोगों को जोड़ता आया है। सदियों पहले जैन परंपरा के आदरणीय मुनि कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य यहां आए थे और कहा जाता है कि प्रार्थना के बाद उन्होंने कहा, “भवबीजाङ्कुरजनना रागाद्याः क्षयमुपगता यस्य।" अर्थात्, उस परम तत्व को नमन जिसमें सांसारिक बंधनों के बीज नष्ट हो चुके हैं। जिसमें राग और सभी विकार शांत हो गए हैं। आज भी दादा सोमनाथ के दर्शन से ऐसी ही अनुभूति होती है। मन में एक ठहराव आ जाता है, आत्मा को अंदर तक कुछ स्पर्श करता है, जो अलौकिक है, अव्यक्त है।"

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