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Rajat Sharma's Blog | ट्रम्प का टैरिफ : चुनौती भी, अवसर भी

 Published : Apr 04, 2025 02:20 pm IST,  Updated : Apr 04, 2025 02:20 pm IST

डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ से अमेरिका में मिलने वाली भारतीय वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। इसका मतलब होगा उनकी कम डिमांड और अमेरिका को कम निर्यात। लेकिन सकातरात्मक संकेत ये है कि जिन देशों से हमारी व्यापार प्रतिस्पर्धा है, उनके टैरिफ और भी ज्यादा बढ़ाए गए हैं।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दुनिया भर के ज़्यादातर देशों पर टैरिफ लगाए जाने के बाद गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आई। Dow Jones Industrial Average, S&P index, Nasdaq indices में तेज़ी से गिरावट आई। टैरिफ से दुनिया भर में आर्थिक मंदी और टैरिफ युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। चीन ने अमेरिका से कहा है कि वो 34 प्रतिशत टैरिफ वापस ले, वरना वह जवाबी कदम उठाएगा। भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि उद्योगों और निर्यातकों से लगातार बातचीत जारी है और भारत पर लगाये गये 26 प्रतिशत टैरिफ से व्यापार और उद्योग पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जा रहा है। ट्रम्प ने भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर, सेमीकंडक्टर, कॉपर और कुछ एनर्जी प्रोडक्ट्स जैसे तेल, गैस, LNG और कोयले को इस टैरिफ से छूट दी है, लेकिन ट्रंप के इस फ़रमान से देश के टैक्सटाइल, डायमंड, ऑटोमोबाइल और स्टील इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ सकता है।  डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ से अमेरिका में मिलने वाली भारतीय वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। इसका मतलब होगा उनकी कम डिमांड और अमेरिका को कम निर्यात। लेकिन सकातरात्मक संकेत ये है कि जिन देशों से हमारी व्यापार प्रतिस्पर्धा है, उनके टैरिफ और भी ज्यादा बढ़ाए गए हैं। इस कारण कपड़ा  और electronics जैसे क्षेत्रों में भारत का निर्यात बढ़ सकता है। चीन, थाईलैंड और बांग्लादेशी  निर्यात पर high tarriff का फायदा भारत को होगा। machinery, toys, automobiles जैसे क्षेत्रों में भारत अपना प्रोडक्शन बढ़ा सकता है और उन्हें अमेरिका को निर्यात कर सकता है। भारत के पास अच्छा खासा मौका है, लेकिन इस मौके का फायदा उठाने के लिए भारत को Ease of doing business पर ध्यान देना होगा, लॉजिस्टिक और इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करना होगा।

वक्फ बिल : अब ये कानून है , विधान है 

संसद ने कल देर रात वक्फ संशोधन बिल पर अपनी मुहर लगा दी। राज्य सभा ने 12 घंटे की बहस के बाद इसे 95 के मुकाबले 128 वोट से पास कर दिया। अब राष्ट्रपति जी की मुहर लगने के बाद ये कानून बन जाएगा। वक्फ बिल के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, TDP और JDU का समर्थन। दोनों को मुस्लिम वोट खोने का डर दिखाया गया लेकिन चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार ने देश के मूड को समझा, वक्फ के बिल का समर्थन किया। इसका एक असर ये होगा कि अब मोदी सरकार की स्थिरता पर कोई सवाल नहीं उठाएगा। जिस मसले को लेकर मौलवी मौलाना इतनी हायतौबा कर रहे हों,अगर उस पर JDU और TDP मोदी का समर्थन कर सकती है, तो फिर ये समर्थन पक्का है। लेकिन बिहार में चुनाव है। इसीलिए वहां नीतीश कुमार की JD-U के लिए परेशानियां खड़ी करने की कोशिश की जाएंगी। ममता के लिए मुसलमानों का समर्थन ज़रूरी है। इसीलिए वो कह रही हैं कि एक दिन ऐसा आएगा जब वो वक्फ के कानून को रद्द करवा देंगी। इसमें कुछ गलत नहीं है। ये उनकी विचारधारा है। इसी तरह जो मौलाना सड़कों पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं, इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करने की बात कर रहे हैं,उनसे भी किसी को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। परेशानी उन लोगों से है, जो ये कहते हैं कि संसद में कानून बनने के बाद भी वो इसे नहीं मानेंगे। जो कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ जाए तो उसे भी नहीं मानेंगे, ऐसे लोग जो कानून के खिलाफ हैं, संसद की मुखालफ़त करते हैं, संविधान को नहीं मानते, ऐसे लोगों को सजा मिलनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला : ममता के लिए झटका

ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में 25 हजार से ज्यादा शिक्षकों और स्कूल स्टाफ की नियुक्तियों को रद्द कर दिया। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरी चयन प्रणाली की विश्वसनीयता खत्म हो गई। नियुक्तियों में धोखाधड़ी और जालसाज़ी हुई। हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। इसलिए दिव्यांगों को छोड़कर 2016 में भर्ती किए गए सभी शिक्षकों और स्कूल स्टॉफ को हटाया जाए और तीन महीने के भीतर फिर से भर्ती की जाए। इतने सालों में इन लोगों ने जो सैलरी ली है, उन्हें वो भी लौटानी होगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन टीचर्स के अपॉइंटमेंट में गड़बड़ी नहीं मिली हैं उन्हें सैलरी नहीं लौटानी होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब वो सारे शिक्षक सड़क पर आ गए हैं। जिन्होंने मेहनत से, ईमानदारी से परीक्षा पास करके नौकरी हासिल की थी, उन शिक्षकों ने कहा कि वो पिछले 7 साल से नौकरी कर रहे हैं, नई नौकरी की उम्र भी निकल गई, अब वो कहां जाएंगे? परिवार को कैसे पालेंगे? इन शिक्षकों ने कहा कि घोटाला ममता बनर्जी की सरकार ने किया लेकिन इसकी सज़ा उन्हें मिली। ममता बनर्जी ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हैं, 25 हजार शिक्षकों को अचानक हटा दिया जाएगा तो इसका असर पूरी शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। ममता ने कहा कि जिन लोगों ने घोटाला किया, वो जेल में हैं, उन्हें सज़ा भी मिलेगी, लेकिन एक व्यक्ति के अपराध की सजा इतने लोगों को देना ठीक नहीं है। मैं ये देखकर हैरान हूं कि ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर दिया। ये कोई पहला मौका नहीं है जब किसी कोर्ट ने किसी राज्य सरकार की नियुक्तियों को रद्द किया हो। कोर्ट ने कहा है कि 25 हजार लोगों की नियुक्ति में धोखाधड़ी हुई है।  लेकिन उन लोगों का क्या होगा,जो इस बेईमानी के प्रोसेस के जरिए सेलेक्ट हुए। जाहिर है उनकी नौकरियां चली जाएंगी, उनके परिवारों का क्या होगा। कितनी बार ऐसा हो चुका है। सवाल ये है कि नियुक्तियों में हेराफेरी बार-बार पकड़ी जाती है। राजनीतिक फायदे के लिए हेराफेरी होती है और अन्त में नुकसान उन गरीब लोगों को होता है जिनकी नौकरियां जाती हैं। ये सिलसिला रुकना चाहिए। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 3 अप्रैल, 2025 का पूरा एपिसोड

 

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