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सिर्फ कुछ दिन बाद आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा? सूरज की तरफ तेजी से बढ़ रहा है धूमकेतु

 Published : Feb 06, 2026 04:59 pm IST,  Updated : Feb 06, 2026 05:12 pm IST

नया धूमकेतु C/2026 A1 (MAPS) अप्रैल की शुरुआत में सूर्य के बेहद पास से गुजरेगा। अगर सूर्य के पास से गुजरते हुए यह बगैर टूटे बचा रहा, तो दिन में भी दिखाई दे सकता है। यह क्रूट्ज सनग्रेज़िंग परिवार का दुर्लभ धूमकेतु है और दक्षिणी गोलार्ध में शानदार नजारा दे सकता है।

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धूमकेतु सूर्य के बेहद करीब से गुजरने वाला है। इस तस्वीर में नासा का सोलर प्रोब नजर आ रहा है। Image Source : NASA/JOHNS HOPKINS APL/STEVE GRIBBEN

Kreutz sungrazing comet | यूनिवर्स में दिलचस्पी रखने वालों के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है। पिछले दिनों एक नए धूमकेतु C/2026 A1 (MAPS) की खोज हुई है, जिसकी वजह से अप्रैल की शुरुआत में आकाश में शानदार नजारा देखने को मिल सकता है। बता दें कि यह धूमकेतु सूरज के बहुत करीब से गुजरेगा और अगर इसमें कोई टूट-फूट नहीं हुई, तो यह दिन के उजाले में भी नजर आ सकता है। इस धूमकेतु को 13 जनवरी 2026 को चिली के अटाकामा रेगिस्तान में स्थित एक रिमोट कंट्रोल्ड टेलिस्कोप से 4 शौकिया खगोलशास्त्रियों की टीम ने खोजा था।

सूर्य के करीब से गुजरते हैं क्रूट्स धूमकेतु

एलेन मॉरी, जॉर्जेस अटार्ड, डैनियल पैरॉट और फ्लोरियन सिग्नोरेट नाम के इन खगोलशास्त्रियों ने MAPS प्रोग्राम के तहत यह खोज की थी। खोज के समय धूमकेतु सूरज से 2.056 AU यानी कि करीब 30 करोड़ किलोमीटर दूर था, और यह सूर्य से सबसे ज्यादा दूरी पर खोजा जाने वाला धूमकेतु बन गया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 1965 के धूमकेतु इकेया-सेकी के पास था। यह धूमकेतु 'क्रूट्स सनग्रेजिंग' परिवार का सदस्य है। बता दें कि इस परिवार के धूमकेतु सूरज के बहुत करीब से गुजरते हैं। इतिहास के कई चमकीले और शानदार नजारा दिखाने वाले धूमकेतु इसी परिवार से आए हैं।

इकेया-सेकी ने किया था पूर्णिमा जितना उजाला

'क्रूट्स सनग्रेजिंग' परिवार के कुछ सबसे चर्चित धूमकेतुओं में 1882 का ग्रेट कमेट, 1965 का Ikeya-Seki और 2011 का Lovejoy धूमकेतु शामिल हैं। इकेया-सेकी 20वीं सदी का सबसे चमकदार धूमकेतु था और इसने पूर्णिमा के चांद जितना उजाला किया था जबकि लवजॉय शुक्र ग्रह जितना चमकीला नजर आया था। क्रूट्ज परिवार के धूमकेतु एक पुराने बड़े धूमकेतु के टुकड़े हैं। हजारों साल पहले, शायद तीसरे या चौथे ईसा पूर्व में एक 100 किलोमीटर से भी बड़ा धूमकेतु सूरज के बहुत करीब आया और टूट गया। उसके बाद उसके टुकड़े अलग-अलग समय पर लौटते रहे और और टूटते गए।

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Image Source : NASA/JOHNS HOPKINS APL/STEVE GRIBBENधूमकेतु सूर्य के बेहद करीब से गुजरने वाला है। इस तस्वीर में नासा का सोलर प्रोब नजर आ रहा है।

आज भी तैर रहे हैं धूमकेतु के हजारों टुकड़े

सन 363 में कई धूमकेतु एक साथ दिन के उजाले में दिखे थे। 11वीं सदी में 1106 और 1138 में नजर आए ग्रेट कमेट या बड़े धूमकेतु भी इसी परिवार से थे। आज भी हजारों छोटे टुकड़े SOHO स्पेसक्राफ्ट से देखे जाते हैं, लेकिन बड़े टुकड़े दुर्लभ होते हैं। C/2026 A1 (MAPS) की खोज दूर से होने के कारण ये खास हो गया है। इससे लगता है कि इसका नाभिक या न्यूक्लियस सामान्य से बड़ा हो सकता है। यह धीरे-धीरे चमकदार हो रहा है, जो बताता है कि यह बड़ा टुकड़ा है, और अभी टूट भी नहीं रहा है। हालांकि, आधुनिक तकनीक से पुराने धूमकेतुों की तुलना में इसका नाभिक इकेया-सेकी जितना बड़ा नहीं लगता, इसलिए यह उतना चमकीला नहीं होगा।

सूरज की सतह के करीब से गुजरेगा धूमकेतु

अप्रैल की शुरुआत में यह धूमकेतु सूरज की सतह से सिर्फ 1,20,000 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। अगर यह अपने रास्ते पर तेज गर्मी और गुरुत्वाकर्षण से बच गया, तो शाम के समय आकाश में शानदार नजारा दिखेगा। इसके आकार को देखते हुए माना जा रहा है कि यह दिन के उजाले में भी दिख सकता है। Kreutz धूमकेतु दक्षिणी गोलार्ध से ज्यादा आसानी से दिखते हैं, इसलिए भारत के दक्षिणी हिस्सों या ऑस्ट्रेलिया जैसे इलाकों में बेहतर नजर आएगा। अगर सूर्य के पास से गुजरते हुए यह टूट भी जाता है तो अचानक काफी ज्यादा चमक बिखेर सकता है। हालांकि अभी कुछ कहना मुश्किल है, और ऐसे धूमकेतु कई बार टूट जाते हैं।

फिलहाल  सभी की नजरें अप्रैल की तरफ

इस धूमकेतु को लेकर कोई कुछ भी कहे, लेकिन अगर यह सूर्य की गर्मी को झेल पाया तो अप्रैल में शाम के आकाश में शानदार नजारा देखने को मिलेगा। SOHO स्पेसक्राफ्ट से इसकी अच्छी तस्वीरें मिलेंगी। खगोलशास्त्री जेनेक सेकानिया की भविष्यवाणी के मुताबिक, आने वाले दशकों में 2 बड़े क्रूट्ज धूमकेतु दिख सकते हैं, और यह उनमें से एक हो सकता है। ऐसे में अब सभी की नजरें फिलहाल अप्रैल की तरफ हैं जब हमें एक ऐसा शानदार नजारा देखने को मिल सकता है जो हम शायद जिंदगी में कोई दोबारा न देख पाएं।

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