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आयु में छूट लेने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार सामान्य श्रेणी में दावा नहीं कर सकते, SC ने त्रिपुरा हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किया

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Niraj Kumar
 Published : Sep 10, 2025 06:01 pm IST,  Updated : Sep 10, 2025 06:33 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर उम्र में छूट (Age Relaxation) लेता है, तो वह सामान्य वर्ग में नहीं जा सकता। यह तब लागू होगा जब भर्ती के नियमों में इसकी मनाही लिखी हो।

Supreme Court- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : PTI

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम फैसला लेते हुए त्रिपुरा हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें यह कहा गया था कि अर्धसैनिक बलों की भर्ती में आरक्षण के तहत उम्र सीमा का लाभ उठा चुके ओबीसी उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में गिना जाए। सुप्रीम कोर्ट त्रिपुरा हाईकोर्ट इस आदेश को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि ऐसा करना नियमों के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि  आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर उम्र में छूट (Age Relaxation) लेता है, तो वह सामान्य वर्ग में नहीं जा सकता। यह तब लागू होगा जब भर्ती के नियमों में इसकी मनाही लिखी हो।

आरक्षण का लाभ लेने वाले जनरल सीट पर दावा नहीं कर सकते

त्रिपुरा हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि अर्धसैनिक बलों की भर्ती में ओबीसी उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में गिना जाए,जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई ओबीसी/एससी/एसटी अभ्यर्थी आरक्षण का फायदा (जैसे उम्र में छूट) लेता है, तो वह बाद में जनरल सीट पर दावा नहीं कर सकता। यह सिर्फ तभी संभव है,जब नियमों में इसकी इजाज़त हो।

जानिए पूरा मामला

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि अगर उम्मीदवार एक बार उम्र में छूट का लाभ लेता है तो वह सामान्य श्रेणी में नहीं गिना जा सकता। दरअसल, यह विवाद कर्मचारी चयन आयोग की कांस्टेबल (GD) की भर्ती से जुड़ा थे। इसके तहत BSF, CRPF, ITBP, SSB, NIA, SSF और असम राइफल्स में भर्तियां होनी थीं। इसके लिए उम्र सीमा 18 से 23 वर्ष के बीच थी जबकि ओबीसी उम्मीदवारों को उम्र में तीन साल की छूट दी गई थी।

कई उम्मीदवारों ने जो आरक्षित वर्ग के थे, उम्र सीमा का लाभ उठाकर आवेदन किया लेकिन वे ओबीसी कोटे में सेलेक्ट नहीं हुए। उनके नंबर सामान्य श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवारों से ज्यादा थे। उन्होंने इसी के आधार पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और यह दलील दी कि उनकी योग्यता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हाईकोर्ट ने 2010 के जितेंद्र कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले का हवाला देकर उनके पक्ष में फैसला दिया।

केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और एक जुलाई 1998 के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला दिया। इस मेमोरेंडम में साफ लिखा था कि कि उम्र या अन्य छूट लेने वाले उम्मीदवार सामान्य श्रेणी (General Category ) की सीटों पर दावा नहीं कर सकते। 

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