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'माफ कीजिए मिस्टर, जब हम अदालत में बैठते हैं तो किसी धर्म के मानने वाले नहीं रहते', वक्फ पर बहस के दौरान बोले चीफ जस्टिस

 Published : Apr 17, 2025 06:32 am IST,  Updated : Apr 17, 2025 06:32 am IST

वक्फ बिल को लेकर घमासान मचा हुआ है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बेंच और सॉलिसिटर जनरल के बीच तब तीखी नोकझोंक हुई जब न्यायाधीशों ने वक्फ प्रशासन में गैर-मुस्लिमों को अनुमति देने के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया।

CJI Sanjiv Khanna- India TV Hindi
प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना Image Source : PTI

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को दो घंटे सुनवाई हुई। इस कानून के खिलाफ 70 से ज्यादा याचिकाएं लगाई गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा है। केंद्र को 2 हफ्ते के अंदर जबाव दाखिल करना है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून के विरोध में देशभर में हो रही हिंसा पर चिंता भी जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के समर्थन में केंद्र द्वारा पेश की गई उस दलील पर भी कड़ा संज्ञान लिया कि इस तर्क के अनुसार, हिंदू जजों की बेंच को वक्फ से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई नहीं करनी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के उन प्रावधानों पर सवाल कर रही थी जो केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की अनुमति देते हैं।

क्या बोले चीफ जस्टिस?

चीफ जस्टिस ने कहा, ‘‘क्या आप ये सुझाव दे रहे हैं कि मुस्लिमों सहित अल्पसंख्यकों को भी हिंदू धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करने वाले बोर्ड में शामिल किया जाना चाहिए? कृपया इसे खुलकर बताएं।’’ मामले में केंद्र का प्रतिनिधित्व करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रावधानों का बचाव करते हुए जोर दिया कि गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना सीमित है और इन निकायों की मुख्य रूप से मुस्लिम संरचना को प्रभावित नहीं करता है। मेहता ने यह भी कहा कि गैर-मुस्लिम भागीदारी पर आपत्ति तार्किक रूप से न्यायिक निष्पक्षता तक विस्तारित हो सकती है और उस तर्क से, बेंच स्वयं मामले की सुनवाई करने से ‘‘अयोग्य’’ हो जाएगी।

'माफ कीजिए मिस्टर मेहता, हम केवल...'

मेहता ने कहा कि यदि वैधानिक बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की उपस्थिति पर आपत्ति स्वीकार कर ली जाती है, तो वर्तमान बेंच भी मामले की सुनवाई नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘तब यदि हम उस तर्क के अनुसार चलते हैं, तो माननीय (मौजूदा बेंच के न्यायाधीश) इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते।’’ इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, ‘‘नहीं, माफ कीजिए मिस्टर मेहता, हम केवल न्याय निर्णय के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। जब हम यहां बैठते हैं, तो हम किसी धर्म के मानने वाले नहीं रह जाते हैं। हम पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष हैं। हमारे लिए, एक पक्ष या दूसरा पक्ष समान है।’’

आज अंतरिम आदेश पारित कर सकता है सुप्रीम कोर्ट

वहीं, आपको बता दें कि वक्फ कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज लगातार दूसरे दिन सुनवाई जारी रहेगी। आज इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश जारी कर सकता है। वक्फ संपत्तियों को डि-नोटिफाई करने, कलेक्टर की जांच के दौरान नए प्रावधान लागू ना करने और वक्फ बोर्ड के साथ काउंसिल में गैर मुस्लिमों की एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ये अंतरिम आदेश पारित करेगा। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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