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तमिलनाडु में सीएम स्टालिन ने डीएमके सांसदों की बुलाई इमर्जेंसी बैठक, जानिए क्या है खास वजह

 Published : Apr 15, 2026 11:05 am IST,  Updated : Apr 15, 2026 11:06 am IST

सीएम स्टालिन ने सांसदों को संसद में मजबूती से राज्य का पक्ष रखने के निर्देश दिया है। चेतावनी दी कि यदि परिसीमन से तमिलनाडु के हित प्रभावित होते हैं, तो राज्य में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है।

सीएम एमके स्टालिन- India TV Hindi
सीएम एमके स्टालिन Image Source : X/MKSTALIN

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आज पार्टी सांसदों की आपात बैठक बुलाई है। सीएम स्टालिन के अध्यक्ष में प्रस्तावित निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन प्रक्रिया के संबंध में तमिलनाडु को संभावित रूप से प्रभावित करने वाले परिणामों पर चर्चा करने के लिए बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, उनमें राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रभाव और संसदीय सीटों के पुनर्वितरण में निष्पक्षता संबंधी चिंताएं शामिल हैं। 

लोकसभा सीटों को बढ़ाने का प्रस्ताव

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023, लोकसभा में परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है। इसलिए सरकार ने सदन में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और शेष 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित हैं। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। 

विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर उठाया मुद्दा

एमके स्टालिन ने कई अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर यह मुद्दा उठाया है कि प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, लोकसभा में सीटों की संख्या में आनुपातिक आधार पर वृद्धि नहीं करता है और कथित तौर पर सदन में दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम कर देगा।

केंद्र सरकार को दी चेतावनी

मंगलवार को एमके स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों से उचित परामर्श किए बिना संवैधानिक संशोधन को 'जबरदस्ती थोपने' का इरादा रखती है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाया जाता है या दक्षिणी राज्यों पर असमान रूप से प्रभाव पड़ता है तो तमिलनाडु एक बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। 

जबरन बुलाया जा रहा सत्र

एक वीडियो में मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा, 'तमिलनाडु के दरवाजे तक पहुंच चुके गंभीर खतरे के बारे में बात करना और केंद्र सरकार की भाजपा सरकार को स्पष्ट चेतावनी देना। चुनाव प्रचार की तेज रफ्तार के बीच भी इस कर्तव्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परसों, 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। सटीक कहें तो तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावों के बीच इसे जबरन बुलाया जा रहा है। इस सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन को जबरदस्ती पारित कराने का इरादा रखती है।' 

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों ने पहले केंद्र द्वारा दी गई सलाह के अनुसार जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन उपायों का पालन किया था, लेकिन अब उन्हें इसके संभावित परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने लोकसभा में सीटों की संख्या में आनुपातिक आधार पर वृद्धि की मांग की है। 

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