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सोनिया ने महंगाई, सांसदों का निलंबन, नगालैंड के मुद्दे पर केंद्र को घेरा, बॉर्डर के हालात पर चर्चा की मांग की

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Dec 08, 2021 02:03 pm IST,  Updated : Dec 08, 2021 02:03 pm IST

सीपीपी की बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी और पार्टी के कई अन्य सांसद शामिल हुए।

सोनिया ने महंगाई, सांसदों का निलंबन, नगालैंड के मुद्दे पर केंद्र को घेरा, बॉर्डर के हालात पर चर्चा क- India TV Hindi
सोनिया ने महंगाई, सांसदों का निलंबन, नगालैंड के मुद्दे पर केंद्र को घेरा, बॉर्डर के हालात पर चर्चा की मांग की  Image Source : ANI

Highlights

  • नगालैंड की घटना पर केवल अफसोस जता देना ही पर्याप्त नहीं है-सोनिया
  • किसानों की इस बड़ी उपलब्धि को हम सलाम करते हैं-सोनिया

नयी दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महंगाई, बेरोजगारी, राज्यसभा के 12 सदस्यों के निलंबन, टीकाकरण और नगालैंड की घटना को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सीमा पर वर्तमान स्थिति एवं पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों पर संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में पूर्ण चर्चा की जानी चाहिए। संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में हुई कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की बैठक में उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा के 12 सदस्यों का निलंबन संविधान और संसदीय नियमों का उल्लंघन है तथा सरकार का यह कदम अप्रत्याशित एवं अस्वीकार्य है। 

सीपीपी की बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी और पार्टी के कई अन्य सांसद शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष ने नगालैंड में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 14 लोगों के मारे जाने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना पर सरकार का केवल अफसोस जता देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आगे ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए उसे ठोस कदम उठाने चाहिए। 

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने आखिरकार तीन कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया है। इस सरकार की, कामकाज की सामान्य शैली के अनुसार, इन कानूनों को भी अलोकतांत्रिक ढंग से निरस्त किया गया जैसे पिछले साल इन्हें बिना चर्चा के पारित करा दिया गया था।’’ उन्होंने कहा कि किसानों के आंदोलन और कांग्रेस की ओर से पुरजोर ढंग से आवाज उठाने के बाद एक ‘अहंकारी सरकार’’ झुकने को विवश हुई। सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘किसानों की इस बड़ी उपलब्धि को हम सलाम करते हैं। हमें याद करना चाहिए कि पिछले एक साल में 700 से अधिक किसान शहीद हो गए और हम उनके बलिदान का सम्मान करते हैं। हम एमएसपी की कानूनी गारंटी और जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग के संदर्भ में किसानों के साथ खड़े हैं।’’ 

उन्होंने कहा कि इस सत्र की शुरुआत से ही कांग्रेस जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाती रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया, ‘‘मैं समझ नहीं पा रही हूं कि मोदी सरकार क्यों और कैसे इतनी असंवेदनशील है और समस्या की गंभीरता से इनकार करती आ रही है। ऐसा लगता है कि सरकार पर लोगों की पीड़ा का कोई असर नहीं है।’’ उनके मुताबिक, सरकार ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें घटाने के लिए जो कदम उठाए वह पूरी तरह अपर्याप्त हैं तथा उसने हर बार की तरह इस बार भी राज्यों पर जिम्मेदारी डाल दी जो पहले से ही वित्तीय बोझ का सामना कर रहे हैं। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया, ‘‘मोदी सरकार बैंकों, बीमा कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, रेल और हवाई अड्डों जैसी राष्ट्रीय संपत्तियों को बेच रही है। पहले प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के जरिये अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया और वह सरकारी संपत्तियों को बेचने के विध्वंसक रास्ते पर चल रहे हैं।’’ उन्होंने सवाल किया कि अगर यही स्थिति रही तो फिर अनुसूचित जाति, जनजति के लोगों और दूसरे बेरोजगार नौजवानों के रोजगार का क्या होगा ?

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘पिछले कुछ समय से सरकार के प्रवक्ता यह दावा करते रहे हैं कि अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर आ रही है। लेकिन यह किसके लिए हो रहा है? असली सवाल यह है। इसके उन करोड़ों लोगों के लिए कोई मायने नहीं हैं जिन्होंने न सिर्फ कोविड महामारी के चलते बल्कि नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण जीएसटी के कारण अपनी आजीविका गंवा दी।’’ उन्होंने कहा कि शेयर बाजार के बढ़ने या कुछ बड़ी कंपनियों के मुनाफा कमाने का यह मतलब नहीं है कि अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही है। कांग्रेस की शीर्ष नेता ने आरोप लगाया कि सीमा पर खड़ी चुनौतियों पर संसद में चर्चा के लिए कोई मौका नहीं दिया गया है। 

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की चर्चा से हमें अपने सामूहिक संकल्प को प्रकट करने का अवसर मिलता। सरकार भले ही कठिन सवालों का जवाब नहीं देना चाहती हो, लेकिन स्पष्टीकरण मांगना विपक्ष का कर्तव्य है। मोदी सरकार चर्चा के लिए समय आवंटित करने से इनकार करती है। मैं फिर से आग्रह करती हूं कि सीमा पर हालात और अपने पड़ोसियों के साथ रिश्तों पर संसद में पूर्ण चर्चा की जाए।’’ कोविड-19 रोधी टीकाकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी को टीकों की दोनों खुराक देने के लिए प्रयास तेज होने चाहिए। सोनिया गांधी ने कोरोना वायरस के नए स्वरूप ‘ओमीक्रोन’ का उल्लेख किया और उम्मीद जताई कि सरकार कोविड महामारी की, पहले की दो लहरों के दौरान मिले अनुभवों से सबक लेगी और वायरस के इस नये स्वरूप से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारी करेगी। उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दों और जनहित के अन्य विषयों पर चर्चा किए जाने पर भी जोर दिया। 

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