बेंगलुरु: देश के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होते ही कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के ताजा बयानों ने ढाई-ढाई साल के सत्ता समझौते की सुगबुगाहट को फिर से हवा दे दी है। शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि समय बताएगा कि वह राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे या नहीं। शिवकुमार का यह बयान इन कयासों के बीच आया है कि कांग्रेस आला कमान जल्द ही नेतृत्व परिवर्तन और राज्य मंत्रिमंडल में बहुप्रतीक्षित फेरबदल पर फैसला ले सकता है।
सिद्धारमैया और शिवकुमार को दिल्ली बुलाएगा कांग्रेस हाईकमान?
सिद्धारमैया नीत राज्य की कांग्रेस सरकार ने सत्ता में 3 साल पूरे कर लिए हैं। संभावना जताई जा रही है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर चल रही रस्साकशी को लेकर सौहार्दपूर्ण चर्चा और समाधान के लिए जल्द ही नई दिल्ली तलब कर सकता है।
CM बनने को लेकर क्या बोले शिवकुमार?
शिवकुमार ने चामराजनगर में संवाददाताओं द्वारा उनके सीएम बनने को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, ''समय बताएगा''। शिवकुमार के समर्थक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पार्टी द्वारा 2023 के विधानसभा चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ हुए कथित सत्ता-साझेदारी समझौते के अनुरूप उन्हें राज्य सरकार की कमान सौंपी जाए।
हाईकमान के फैसले पर टिकी निगाहें
बता दें कि कर्नाटक में यह सियासी चर्चा तेज है कि जब 2023 में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब हाईकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता की साझेदारी का एक गुप्त फॉर्मूला तय किया था। अब जब 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और केरल के आंतरिक मसले सुलझ चुके हैं, तो शिवकुमार के समर्थक चाहते हैं कि पार्टी हाईकमान अपना वादा निभाए।
शिवकुमार के बयान के पीछे क्या है सियासी संदेश?
खुद डिप्टी सीएम ने अपने बयान में कहा है कि वे पार्टी के वफादार सिपाही हैं और हाईकमान जो भी निर्देश देगा, वे उसका पालन करेंगे। हालांकि, उनके इस संयमित बयान के पीछे एक गहरा सियासी संदेश छिपा है जिसने सिद्धारमैया खेमे में खलबली बढ़ा दी हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस हाईकमान ने समय रहते इस कलह को शांत नहीं किया, तो कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लिए आगे की राह बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
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