जगदीप धनखड़ की बेबाकी बनी इस्तीफे की वजह या कुछ और... 305 मिनट में ऐसा क्या हुआ? देखें पूरी टाइमलाइन
जगदीप धनखड़ की बेबाकी बनी इस्तीफे की वजह या कुछ और... 305 मिनट में ऐसा क्या हुआ? देखें पूरी टाइमलाइन
Edited By: Kajal Kumari@lallkajal
Published : Jul 22, 2025 06:49 pm IST,
Updated : Jul 23, 2025 06:33 am IST
उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अचानक इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया, उनके इस बयान से सियासी हलचल तेज हो गई है। उन्होंने सेहत का हवाला दिया है, लेकिन विपक्ष कई तरह के सवाल उठा रहा है।
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जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर सवाल
जगदीप धनखड़ का उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना नई सियासी बहस का मुद्दा बन गया है, धनखड़ ने इस्तीफा दिया या फिर इस्तीफा लिया गया, इसको लेकर ना सिर्फ कयास लग रहे हैं बल्कि जबरदस्त सियासी बयानबाजी भी जारी है। सोमवार की शाम 4 बजे से रात 9 बजकर 5 मिनट के बीच ऐसा क्या हुआ जो धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अचानक से इस्तीफा दे दिया। 305 मिनट का ये सियासी खेल क्या था। ये अब तक पूरी तरफ साफ नहीं है, हालांकि कल की पूरी टाइमलाइन को देखा जाए तो बहुत कुछ हिंट मिलता दिख रहा है।
305 मिनट का खेल, देखें पूरी टाइमलाइन
सोमवार की सुबह 11 बजे मॉनसून सत्र की शुरूआत होती है।
11 बजकर 16 मिनट पर धनखड़ नेता विपक्ष खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हैं।
11 बजकर 45 मिनट पर ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर हंगामा होता है और धनखड़ राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित कर देते हैं।
दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक होती है।
2 घंटे बाद जगदीप धनखड़ जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करते हैं।
शाम 4 बजकर 7 मिनट पर महाभियोग प्रक्रिया की जानकारी सदन में देते हैं और फिर 4 बजकर 19 मिनट पर सदन से बाहर चले जाते हैं।
शाम साढ़े चार बजे दोबारा बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक होती है, उसके बाद ठीक पांच बजे धनखड़ विपक्षी नेताओं से मुलाकात करते हैं।
फिर ठीक 305 मिनट बाद रात 9 बजकर 5 मिनट पर धनखड़ राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज देते हैं।
अगली दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर राष्ट्रपति की तरफ से इस्तीफा मंजूर हो जाता है।
12 बजकर 19 मिनट पर पीएम मोदी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर धनखड़ की बेहतर स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
विपक्ष ने क्या कहा
सारी बात यहीं खत्म हो जाती है लेकिन विपक्ष को इसमें कुछ ठीक नहीं लगता। विपक्ष के नेता संजय सिंह कहते हैं धनखड़ को मनाया नहीं गया, गौरव गोगोई कहते हैं केंद्र से रिश्ता ठीक नहीं था इसलिए कुर्सी गई। अशोक गहलोत कहते हैं धनखड़ दबाव में थे। तो वहीं, संजय राउत कहते हैं दिल्ली में कुछ बड़ा हो रहा है। राजद के मनोज झा शिकायत करते हैं कि बीजेपी सबकुछ रहस्यमयी रखती है। इमरान मसूद कहते हैं धनखड़ ने आहत होकर इस्तीफा दिया। अखिलेश कहते हैं इसपर राजनीति ठीक नहीं, जबकि डिंपल यादव को दाल में कुछ काला दिखता है।
ऐसे में सवाल ये कि क्या वाकई स्वास्थ्य कारणों से धनखड़ ने इस्तीफा दिया..या उनसे इस्तीफा लिया गया। सवाल ये भी कि कल पूरे दिन राज्यसभा की कार्यवाही चलाने के बाद अचानक धनखड़ को क्या हुआ और सबसे दिलचस्प सवाल ये कि जो धनखड़ अपने दो साल के कार्यकाल में विपक्ष की आंखों को चुभते रहें। आज अचानक विपक्ष को इतने अच्छे क्यों लगने लगे हैं।
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