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AIIMS जम्मू किफायती दरों पर जीनोमिक रिपोर्ट उपलब्ध कराने वाला देश का पहला सरकारी अस्पताल बना

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Sep 26, 2025 10:55 pm IST,  Updated : Sep 26, 2025 11:33 pm IST

भारत में सटीक चिकित्सा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एम्स जम्मू, देश भर के मरीजों को किफायती दरों पर अत्याधुनिक जीनोमिक परीक्षण सेवाएँ प्रदान करने वाला देश का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है।

AIIMS जम्मू- India TV Hindi
AIIMS जम्मू Image Source : X/@AIIMSJAMMU

जम्मूः अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जम्मू, भारत का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है जो देश भर में किफायती दामों पर अत्याधुनिक जीनोमिक परीक्षण सेवाएं प्रदान करेगा। यह एम्स जम्मू और इंफोसिस समर्थित हेल्थटेक कंपनी 4बेसकेयर के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास का हिस्सा है। एम्स ने कुछ ही महीनों में फेफड़े, स्तन, डिम्बग्रंथि और पेट के कैंसर सहित 15 से अधिक प्रकार के कैंसर के रोगियों की 125 जीनोमिक रिपोर्ट सफलतापूर्वक प्रदान की हैं। जो किफायती और सुलभ कैंसर देखभाल में महत्वपूर्ण है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया था उद्घाटन 

यह केंद्र सरकार और इंफोसिस की मदद से एम्स जम्मू और बेंगलुरु स्थित स्वास्थ्य-तकनीक फर्म 4बेसकेयर के बीच सहयोग से ही संभव है। इसका औपचारिक उद्घाटन 2 फरवरी, 2025 को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया था। 

उद्घाटन के समय केंद्रीय जितेंद्र सिंह ने कहा था कि जीन थेरेपी प्रत्येक रोगी के लिए रोग के व्यक्तिगत प्रबंधन का वादा करती है। भले ही दो व्यक्ति एक ही स्थिति से पीड़ित क्यों न हों। चाहे वह कैंसर हो, गुर्दे की बीमारी हो या कोई अन्य बीमारी। प्रत्येक मामले में उपचार अलग-अलग हो सकता है, जो व्यक्ति की विशिष्ट आनुवंशिक संरचना, पहले से मौजूद संवेदनशीलता और विरासत में मिली कमजोरियों पर निर्भर करता है। 

विदेश में लगते थे 3-5 लाख रुपये

जानकारी के मुताबिक, कैंसर के लिए जीनोमिक टेस्ट विदेश भेजे जाते थे, जिनकी लागत 3 से 5 लाख रुपये के बीच होती थी। जबकि देश में 1.5 से 2.5 लाख रुपये लगते थे। एक सीनियर डॉक्टर ने कहा कि AIIMS जम्मू ने इन लागतों को लगभग एक-चौथाई तक कम कर दिया है। 

दुर्लभ आनुवंशिक विकारों के निदान में मिलेगी मदद

इस पहल का केंद्र इंडीजीन है जो भारत का पहला जनसंख्या-विशिष्ट कैंसर जीन पैनल है, जिसे स्वदेशी अनुसंधान के माध्यम से विकसित किया गया है और इसे मेड इन इंडिया डीपटेक नवाचार के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह सुनिश्चित करता है कि परीक्षण के परिणाम भारतीय रोगियों की विशिष्ट आनुवंशिक संरचना के अनुरूप हों। डॉ. गुप्ता ने भारत में वंशानुगत और दुर्लभ विकारों के बढ़ते बोझ पर प्रकाश डाला और जीनोमिक निदान सेवाओं को स्वास्थ्य संबंधी व्यापक मुद्दों तक विस्तारित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।

इस दिशा में, केंद्र दुर्लभ और वंशानुगत कैंसर रोगों के लिए जीनोमिक्स-आधारित विभेदक निदान प्रदान करने की योजना बना रहा है और खुद को भारत और पड़ोसी देशों के लिए एक संदर्भ केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। वही उन्नत तकनीक जो कैंसर के उपचार को व्यक्तिगत बनाती है, दुर्लभ आनुवंशिक विकारों के निदान और पारिवारिक स्वास्थ्य योजना को निर्देशित करने में भी मदद करेगी।

हितेश गोस्वामी ने कही ये बात

इस बीच, 4बेसकेयर के सीईओ हितेश गोस्वामी ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि कैसे भारत वैश्विक मानकों के अनुरूप घरेलू स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान कर सकता है। भारत तेज़ी से सटीक चिकित्सा के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है।

डॉ. शक्ति गुप्ता ने कही ये बात

वहीं, एम्स जम्मू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और कार्यकारी निदेशक डॉ. शक्ति गुप्ता ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में वंशानुगत और दुर्लभ विकार दर्ज किए जाते हैं, जिससे केंद्र के लिए व्यापक स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करना महत्वपूर्ण हो जाता है। एम्स न केवल दुर्लभ और वंशानुगत बीमारियों का निदान करेगा बल्कि भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों के लोगों की बीमारी का भी निदान करेगा।

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