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पीएम मोदी 13 जनवरी को सोनमर्ग टनल का करेंगे उद्घाटन, जानिए देश के लिए क्यों है ये खास और क्या हैं इसके फायदे

 Reported By: Manzoor Mir Edited By: Niraj Kumar
 Published : Jan 11, 2025 10:14 pm IST,  Updated : Jan 11, 2025 10:14 pm IST

पीएम मोदी के दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बता दें कि सोनमर्ग की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच बनाई गई यह सुरंग 6.5 किलोमीटर लम्बी है। यह गगनगीर से सोनमर्ग तक जाती है।

Sonamarg Tunnel- India TV Hindi
सोनमर्ग टनल Image Source : INDIA TV

सोनमर्ग:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 13 जनवरी को जम्मू कश्मीर में सोनमर्ग सुरंग (Tunnel) का उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी की इस यात्रा के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। प्रधानमंत्री गंदेरबल जिले में 6.5 किमी लंबी जेड-मोड़ टनल का उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी के इस ऐतिहासिक दौरे के मद्देनजर कश्मीर में हाई अलर्ट है। मध्य कश्मीर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अर्धसैनिक बलों के साथ मिलकर अतिरिक्त चौकियां स्थापित की हैं और विशेष रूप से मध्य कश्मीर में निगरानी बढ़ा दी है, ताकि सुरक्षित और सुचारू कार्यक्रम सुनिश्चित किया जा सके।

टनल के पूरे इलाके पर एसपीजी की निगरानी है जबकि जम्मू कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवान सेंट्रल कश्मीर के गंदेरबल से लेकर सोनमर्ग तक पूरे इलाके पर नजर रख रहे हैं। सोनमर्ग को 11 जनवरी से 13 जनवरी शाम तक नाकेबंदी के तौर पर बंद कर दिया गया है। वीआईपी मूवमेंट और पुलिस कर्मियों के अलावा किसी को भी वहां जाने की इजाजत नहीं है. जिन जगहों से पीएम का काफिला गुजरेगा, उन जगहों को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।

गगनगीर से सोनमर्ग तक जाती है टनल

बर्फ से ढंकी सोनमर्ग की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच बनाए गए जेड मोड़ टनल 6.5 किलोमीटर लम्बी है। यह टनल गगनगीर से सोनमर्ग तक जाती है। इस टनल को बनाने का ख़ास मक़सद यह है कि पहलगाम और गुलमर्ग की तरह सोनमर्ग भी साल भर पर्यटकों के लिए ख़ुला रहे। क्योंकि सोनमर्ग कश्मीर का एक ऐसा खूबसूरत पर्यटन स्थल है,जहां जाड़े के मौसम में सबसे ज्यादा बर्फबारी होती है। यहां का तापमान माइनस 25 डिग्री तक नीचे चला जाता हैं। बर्फबारी के चलते यह इलाका कश्मीर और देश के दूसरे राज्यों से करीब 4 महीने के लिए कट जाता था। लेकिन अभी इस टनल के बन जाने से न सिर्फ पर्यटक साल भर सोनमर्ग की सैर कर पाएंगे बल्कि लेह लद्दाख के लोगों का सफर करना भी आसान हो जाएगा। 

आधुनिक सुविधाओं से लैस है यह टनल

इस टनल दो लेन हैं। उसमें इमरजेंसी के लिए भी इंतजाम हैं जिसे एस्केप टनल भी कहा कहा जाता है। यह टनल 100 % तैयार हो चुकी है। इस टनल में वो सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं जो मौजूदा दौर के हिसाब से जरूरी हैं। ख़ासकर सीसीटीवी कैमरा, वाईफाई कनेक्टिविटी, इसके अलावा इस टनल में कई क्रॉस गैलरी बनाये गाये हैं, जिसका इस्तेमाल आग या किसी अन्य दुर्घटना के दौरान इस्तेमाल किया जा सकता है। इन् क्रॉस गैलरी में मोटर गाड़ी से या पैदल चलने की सुविधा होगी। 

ख़ास बात यह है कि इस टनल को हिमस्खलन से भी कोई खतरा नहीं रहेगा। यह टनल न सिर्फ आम लोगों और पर्यटकों के लिए फायदेमंद साबित होगा बल्कि सुरक्षा की लिहाज से सेना के लिए यह टनल काफी अहम है। क्योंकि लद्दाख और कारगिल होते हुए हमारी सीमा चीन और पाकिस्तान से मिलती है। 

लोग बड़ी बेसब्री से कर रहे इंतज़ार

टनल खुलने से कश्मीर के दूसरे खूबसूरत पर्यटन स्थलों की तरह सोनमर्ग भी अब साल भर खुला रहेगा। अमरनाथ यात्रा और लेह लद्दाख का सफर भी आसान होगा। इस टनल के खुलने से टूरिज्म भी बढ़ेगा और लोगों को रोजगार भी मिलेगा। लोगों का मानना है कि टनल का खुलना कभी सपना लगता था लेकिन यह अब एक हकीकत है। इससे ना सिर्फ यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा बल्कि यह इलाक़ा भी सालभर खुला रहेगा।

Sonamarg Tunnel
Image Source : FILEसोनमर्ग टनल

सोनमर्ग की खूबसूरती को देखने आए लोग टूरिस्ट एडवाइजरी के चलते सोनमर्ग नहीं जा पाए। इंडिया टीवी से बात करते हुए इन लोगों ने बताया कि पीएम के दौरे को देखते हुए 13 जनवरी शाम तक सोनमर्ग जाने की इजाजत नहीं दी गई । लेकिन सोनमर्ग के पास की ये खूबसूरती बताती है कि सोनमर्ग कितना खूबसूरत होगा। इन लोगों का मानना है कि सुरंग खुलने के बाद सोनमर्ग भी एक खूबसूरत और आकर्षक टूरिस्ट रिजॉर्ट बन जाएगा।

आपको बता दें कि यह टनल सोनमर्ग से जोजिला टनल को जोड़ती हैं। जोजिला ऐसा इलाका है जो कारगिल और लेह को जोड़ता है। बर्फबारी के दौरान यह इलाका करीब 4 महीने तक बंद हो जाता है। ऐसे में सेना को सरहदों तक हथियार और राशन पहुंचाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब इन दोनों टनल के खुलने से काफी राहत मिलेगी। 

आपको बता दें कि टनल के मजदूर 20 अक्टूबर 2024 को आतंकी हमले की चपेट में आ गए थे। दो आतंकियों ने गगनगीर में मजदूरों के कैंप में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस हमले में एक कश्मीरी डॉक्टर और 6 गैर स्थानीय लोगों की मौत हो गई थी।

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