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'कन्वर्टेड आदिवासियों को ST की लिस्ट से हटाया जाए', बीजेपी नेता चंपई सोरेन ने दिया बड़ा बयान

 Published : Dec 05, 2025 08:00 pm IST,  Updated : Dec 05, 2025 08:00 pm IST

बीजेपी विधायक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि दूसरे धर्म में जाने वाले आदिवासियों को ST लिस्ट से हटाना जरूरी है ताकि आदिवासी पहचान और परंपराएं बच सकें। उन्होंने घुसपैठ, आरक्षण के दुरुपयोग और धर्मांतरण को बड़ा खतरा बताते हुए राज्य में SIR करवाने की मांग की।

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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन। Image Source : PTI

जमशेदपुर: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के विधायक चंपई सोरेन ने शुक्रवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि जो आदिवासी दूसरे धर्म में चले गए हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति यानी कि ST की लिस्ट से बाहर करना बहुत जरूरी है। सोरेन ने कहा कि इससे आदिवासी समाज की पहचान और परंपराओं की रक्षा हो सकेगी। चंपई सोरेन ने अपने बयान में कहा, 'धर्मांतरण आदिवासी समाज के वजूद के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। अगर ऐसे ही धर्मांतरण होते रहे तो आने वाले समय में हमारे जाहेरस्थान, सरना स्थल और देशावली में पूजा करने के लिए कोई आदिवासी नहीं बचेगा।'

'आरक्षण का गलत फायदा उठा रहे घुसपैठिए'

चंपई सोरेन ने आगे कहा, 'हमारी परंपरा, संस्कृति और हमारा अस्तित्व ही मिट जाएगा। जो आदिवासी अपनी मर्जी से दूसरा धर्म अपनाना चाहते हैं, वे अपनाएं, इसमें कोई रोक-टोक नहीं। लेकिन उन्हें ST के लिए बने आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों का फायदा नहीं मिलना चाहिए। ऐसे लोगों को लिस्ट से बाहर कर दें तो हमारी पुरानी व्यवस्था और हमारा वजूद बच सकता है।' चंपई सोरेन ने बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ को भी आदिवासी समाज के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि घुसपैठिए आदिवासियों की जमीन हड़प रहे हैं और कुछ इलाकों में शादी करके आरक्षण का गलत फायदा उठा रहे हैं।

चंपई सोरेन ने SIR कराने की भी मांग की

चंपई सोरेन ने इस समस्या से निपटने के लिए झारखंड में विशेष गहन समीक्षा यानी कि SIR कराने की जोरदार मांग की। उनका कहना है कि इससे घुसपैठियों की पहचान आसान होगी और उन्हें वोटर लिस्ट से हटाकर देश से बाहर करना भी सुगम हो जाएगा। इसी मुद्दे पर बीजेपी अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रमेश हंसदा ने भी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि राज्य में नगर निकाय चुनाव तभी कराए जाएं जब SIR पूरा हो जाए। रमेश हंसदा ने चेतावनी दी कि 31 मार्च 2026 तक पूरा करना जरूरी इन नगर निकाय चुनावों को अगर SIR से पहले कराया गया तो चुनाव निष्पक्ष नहीं रहेंगे। (PTI)

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