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ऐसे करें दुर्गा मां के सातवें स्वरूप कालरात्रि मां की पूजा

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Oct 19, 2015 11:45 pm IST,  Updated : Oct 20, 2015 04:01 pm IST

नई दिल्ली: नवरात्र के सातवे दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। नवरात्र के सातवें दिन का काफी महत्व बताया गया है। इन देवी का रूप सभी देवियों से

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नवरात्र के सातवें द‌िन मां दुर्गा के नौ रूपों में से सातवें रूप कालरात्र‌ि की पूजा होती है। इस देवी का स्वरूप सभी देव‌ियों में भयंकर है। ले‌क‌िन भक्तों के ल‌िए माता बहुत ही कल्याणकारी होने के ल‌िए शुभंकरी भी कहलाती हैं।

माता कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुलने लगते हैं और तमाम असुरी शक्तियां इनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भाग जाते है। इसीलिए मां कालरात्रि से सभी दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत उनके स्मरण से ही भाग जाते हैं। जिस व्यक्ति के ऊपर मां की कृपा हो जाए। वह भय मुक्त हो जाता हैं।

दुर्गासप्तशती के पहले चरित्र में बताया गया है कि भगवान विष्णु जब सो रहे थे तब उनके कान के मैल से दो भयंकर असुर मधु और कैटभ उत्पन्न हुए। ये दोनों असुर ब्रह्मा जी को मारना चाहते थे। ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु की योगनिद्रा की आराधना की। ब्रह्मा जी भगवान विष्णु की योगनिद्रा को कालरात्रि, मोहरात्रि के रूप में ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप किया-

कालरात्रिमर्हारात्रिर्मोहरात्रिश्र्च दारूणा. त्वं श्रीस्त्वमीश्र्वरी त्वं ह्रीस्त्वं बुद्धिर्बोधलक्षणा

तब ब्रह्मा जी की वंदना से देवी कालरात्रि ने भगवान विष्णु को निद्रा से जगाया। भगवान विष्णु ने मधु-कैटभ का वध करके ब्रह्मा जी की रक्षा की। जानिए इनकी पूजा विधि के बारें में।

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अगली स्लाइड में पढें कालरात्रि की पूजा-विधि के बारें में

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