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जानिए, क्यों बनाया जाता है रक्षाबंधन का त्यौहार

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Aug 29, 2015 09:32 am IST,  Updated : Aug 31, 2015 07:08 am IST

रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती हैं और उनके लिए मंगल कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को इस पवित्र बंधन के बदले उपहार, उसकी रक्षा करने का वचन देते हैं।

विष्णु पुराण की मान्यता
पुराणों में इस त्यौहार का जिक्र उस समय हुता है जब देवासुर संग्राम हुआ था। विष्णु पुराण में इसका वर्णन अध्याय नवम में किया गया है। पुराण में लिखा है कि देवाताओं और असुरों का संग्राम 12 बर्षों तक चला था। इस संग्राम में देवताओं की हार हुई और असुरों की जीत हुई। असुरों ने देवताओँ के राजा इंद्र को हराकर तीनों लोकों पर अपना अधिकार कर लिया। देवता परास्त होकर जब बह्मा जी के पास पहुंचे तो उन्होने कहा देवता गण आप दुष्टों का संघार करने वाले भगवान विष्णु के पास जाओ वे ही संसार की उत्पत्ति, स्थिति और संघार के कारण हैं। वहां जाने से तुम्हारा कल्याण होगा। तब सारे देवगणों के साथ लोक पितामह श्री बह्मा जी स्वयं क्षीर सागर के तट पर गए। वहां पहुंच कर भगवान विष्णु की स्तुति की। इसके बाद भगवान प्रकट हो बोले मै तुम्हारा बल फिर बढ़ाऊंगा। इसके बाद देवताओं ने अपने गुरु बृहस्पति से विचार विमर्श किया और रक्षा विधान को कहा। तब सावन की पूर्णिमा को प्रात: काल रक्षा का विधान सम्पन्न किया गया। 

येन बद्धोबली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। 
तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल:।।

इन मंत्र से गुरू ने सावन की पूर्णिमा के दिन रक्षा विधान किया। इंद्राणी ने इंद्र के दायें हाथ में रक्षा सूत्र को बांध दिया। इसी सूत्र के बल पर इंद्र ने दानवों पर विजय प्राप्त की।

अगली स्लाइड में पढ़िए राजा बलि से जुड़ी एक मान्यता

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