बसंत पंचमी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है,जो वसंत ऋतु (Spring Season) के आगमन का प्रतीक है। यह त्योहार माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। इसीलिए इस दिन छात्र, कलाकार और संगीतकार विशेष रूप से सरस्वती पूजा करते हैं। शिक्षण संस्थानों और घरों में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित की जाती है। बसंत पंचमी की आमद के साथ ही सर्दियों की विदाई मानी जाती है। इस साल बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जा रही है। ऐसे में यहां पढ़ें बसंत पंचमी की कविताएं।
Basant Pnachami par Kavitaein - बसंत पंचमी की कविताएं
मां सरस्वती की आराधना
हे मां वीणावादिनी,
दो हम सबको ज्ञान।
अंधकार से दूर कर,
कर दो उज्जवल जहान।
बसंत का यह पावन दिन,
करता तुमको नमन।
विद्या-बुद्धि दो हमें,
रहे सदा शुभ चरण।
आई ऋतु बसंत की
पीली चूनर ओढ़ के आई,
ऋतु बसंत सुहानी।
फूल खिले हर डाली-डाली,
महक उठी हर बाग़ की रानी।
टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात
कोयल की कुहुक रात
प्राची में अरुणिम की रेख देख पाता हूं
गीत नया गाता हूं।
मां सरस्वती का आशीर्वाद
वीणा की मधुर धुन गूंजे,
ज्ञान की गंगा बहे।
मां सरस्वती का आशीर्वाद,
हर विद्यार्थी के संग रहे।
पीला रंग बसंती छाया
पीला रंग बसंती छाया,
प्रकृति ने सुंदर रूप दिखाया।
सरसों खेतों में मुस्काए,
हर ओर प्रेम का रंग समाया।
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