शाम को जब आद्या पड़ोस में बच्चों को खेलते देखती है, तो मेरा दिल टूट जाता है। एक वक्त था, जब मेरी भी बेटी चुलबुली बच्ची थी, ऊर्जा और उत्साह से भरपूर, लेकिन जल्द ही सब धूमिल पड़ गया। मैं जानता हूं कि आद्या अपने दोस्तों के साथ खेलना चाहती है लेकिन...। आद्या के दूसरे जन्मदिन के बाद की बात है। उसे तेज बुखार के साथ सारे शरीर पर चकत्ते पड़ गए। हमारे स्थानीय डॉक्टर ने इसे स्किन एलर्जी बताते हुए दवा दे दी। बुखार बना रहा, जिसके बाद हमने दूसरे डॉक्टर से संपर्क किया। जांच का नतीजा आया तो हमारे पैरों तले जमीन खिसक गई। आद्या को बी-सेल अक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया था, एक ऐसा कैंसर जो स्नायुतंत्र को प्रभावित करता है। अब हमें सिर्फ ketto.org के जरिए लोगों मिलने वाली मदद से ही उम्मीद है।
इस बीमारी के बारे में हमें कुछ भी नहीं पता था, लेकिन डॉक्टर का चेहरा सब कुछ बयां कर रहा था। साफ पता चल रहा था कि मामला गंभीर है। अक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत खत्म कर देती है। कैंसर बोन मैरो में शुरू होता है, जहां नए ब्लड सेल्स बनते हैं। ये सेल्स काफी तेजी से बढ़ने लगते हैं और सामान्य सेल्स बनाने की बोन मैरो की क्षमता घटने लगती है। डॉक्टर ने कहा कि आद्या को तुरंत इलाज की जरूरत है, वर्ना कैंसर फैल जाएगा। मार्च से दिसंबर 2016 तक मुंबई के सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल ऐंड रिसर्च सेंटर में वह डॉक्टर श्वेता बंसल की निगरानी में थी। 10 महीने एक इंसान के जीवन में लंबा वक्त होता है। अपनी इकलौती संतान को तरह-तरह के ब्लड टेस्ट और कीमोथेरेपी से गुजरते देखना तकलीफदेह था। उसकी मुस्कान धीरे-धीरे खोती चली गई। वह समझ ही नहीं पा रही थी कि उसके साथ क्या हुआ है। उसकी आंखें मुझसे हजारों सवाल पूछ रही थीं, और मैं मजबूर था।

10 महीने बाद इलाज खत्म हुआ और हमें पूरा यकीन था कि आद्या अब ठीक होने लगेगी। लेकिन सिर्फ 4 महीने बाद, अप्रैल 2017 में हमें यह बुरी खबर मिली कि ल्यूकेमिया ने फिर से जगह बना ली है। हमारी उम्मीदें धराशायी होने लगी थीं। उसके बाद से आद्या 15-30 दिन के अंतराल पर टेस्ट और कीमोथेरेपी के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रही है। वह एक ऐसी जिंदगी जी रही है जैसी किसी भी बच्चे की नहीं होनी चाहिए। आज आद्या 3 साल की है और उसके बचपन को छिनता हुआ देखकर काफी तकलीफ होती है। वह कभी-कभी ही खाती है, हमेशा कमजोर और थका हुआ महसूस करती है। एक हल्का सा इंफेक्शन भी उसके लिए काफी खतरनाक हो सकता है इसलिए वह हमेशा घर पर ही रहती है। धूल से उसका जरा-सा भी सामना घातक हो सकता है इसलिए हमेशा उसके कपड़े, खाने और खिलौने बेहद ही सफाई से दिए जाते हैं।
आद्या को सिर्फ बोन मैरो ट्रांसप्लांट के जरिए ही बचाया जा सकता है, जिसकी लागत 25 लाख रुपये है। हम ketto.org के सहारे धन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि लोग मदद के लिए आगे आएं और एक नन्ही-सी बच्ची की जान बच सके। अभी तक हम आद्या के इलाज पर लगभग 15 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। मैं एक हाउसवाइफ हूं और मेरे पति अपनी नौकरी से 25,000 रुपये महीने कमा पाते हैं। हम पूरी तरह से उनकी तनख्वाह पर निर्भर हैं, और इलाज के लिए लोन लेकर, परिवार के सदस्यों और दोस्तों से उधार लेकर, तथा इंश्योरेंस के जरिए हमने पैसों का जुगाड़ किया। अभी तक हम जितने पैसे जुटा पाए थे सब आद्या के इलाज में खर्च हो चुके हैं।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट सर्जरी के जरिए आद्या की खराब हो चुकी बोन मैरो को स्वस्थ बोन मैरो स्टेम सेल्स के जरिए बदला जाएगा, जिसके बाद वह एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी पाएगी। उसके पिता की बोन मैरो मैच करती है लेकिन हमें अगले एक महीने में 25 लाख रुपये जुटाने हैं। हमारे पास इतने पैसे जुटाने का कोई साधन नहीं है। आद्या की जिंदगी बचाने के लिए हमारे पास एक महीने का वक्त है। पिछले एक साल से आद्या एक बेहद ही कठिन लड़ाई लड़ रही है। अब सिर्फ इस ऑपरेशन से ही उम्मीद है जो आद्या के बुरे सपने को खत्म कर सकती है। सिर्फ आपकी मदद के जरिए ही हम अपनी बेटी को घर ले जा पाएंगे।

हमने आद्या के नाम से Ketto.org पर एक फंडरेजिंग पेज बनाया है। उम्मीद है कि लोग मदद के लिए आगे आएंगे और हम आद्या के इलाज के लिए जरूरी पैसे जुटा पाएंगे। प्लीज, आद्या के बोन मैरो ट्रांसप्लांट में मदद के लिए Ketto.org पर लॉग ऑन करें। आद्या को घर वापस लाने में हमारी मदद करें। आप ही हमारी एकलौती उम्मीद हैं।