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लिट्टी-चोखा सेहत के लिए किस तरह है फायदेमंद, जानकर रह जाएंगे दंग

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Apr 04, 2017 05:04 pm IST,  Updated : Apr 04, 2017 05:04 pm IST

लिट्टी- चोखा सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। वैसे भारत में कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने शायद इसका नाम भी नहीं सुना होगा, लेकिन जिन लोगों ने इसे खाया वह इसके दीवाने हो गए हैं। यह खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है।

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नई दिल्ली: बिहार के लोकप्रिय व्यंजनों में से एक लिट्टी- चोखा सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। वैसे भारत में कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने शायद इसका नाम भी नहीं सुना होगा, लेकिन जिन लोगों ने इसे खाया वह इसके दीवाने हो गए हैं। यह खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है। जी हां, आपको बेशक यह बात सुनकर हैरानी हो कि लिट्टी चोखा सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है, लेकिन यह सच है। इस हम आपके सामने लिट्टी चोखा से खत्म होने वाली कुछ बीमारियों के बारे में जिक्र करने जा रहे हैं। इसके बाद जो लोग इसे पसंद नहीं करते या जिन्होंने इसका नाम नहीं सुना वो लोग भी इस व्यंजन को खूब चाव के साथ खाना शुरु कर देंगे।

बता दें कि लिट्टी चोखा डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से निजात दिलाने में काफी फायदेमंद है, बल्कि बेहद आसानी से इस बीमारी को दूर कर देता। दरअसल दिल्ली के डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. नरेन्द्र विन्नी गुप्ता ने हाल ही में यह बात बताई है कि लिट्टी चोखा डायबिटीज जैसी बीमारी को दूर कर सकता है। बता दें कि चोखा बनाने के लिए बैंगन का इस्तेमाल किया जाता है और यह कोलेस्ट्रॉल को कम रखता है। इसी की वजह से डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां को नियंत्रण में रखा जा सकता है। कोलेस्ट्रॉल कम रहेगा तो रक्त प्रवाह भी सही होगा और हार्ट संबंधी बीमारियां दूर रहेंगी।

वहीं दूसरी तरफ लिट्टी की बात करें तो इसके लिए सत्तु का इस्तेमाल किया जाता है जो कि गेंहू, जौ के आटे और चने से मिलकर बनता है। इन चीजों को ऊर्जा का स्रोत कहा जाता है। इसे खाने से पूरे दिन आपका पेट तो भरा ही रहेगा साथ ही आप में चुस्ती भी बनी रहेगी।

कोलोन कैंसर का खतरा भी कम:-

बैंगन में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुन होने की वजह से यह लीवर में पित्त बनने में सहायता करता है। इसी के कारण डाइेस्टिव सिस्टम में मौजूद टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकलने भी मदद मिलती है, इस कारण कोलोन कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।

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