
डीहाइड्रेशन-
गर्मी के मौसम में डीहाइड्रेशन होना आम बात होती है। इसलिए जरूरी है कि आप पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं। दिन के वक्त तेज धूप में निकलने से बचें। तेज गर्मी में लू लगने का खतरा रहता है जिससे थकान, रक्तचाप कम होना, कमजोरी महसूस होना आदि समस्याएं हो सकती हैं। पानी के अलावा आप नारियल पानी, नींबू पानी, बेल के शरबत आदि से भी अपने शरीर में शीतलता बनाए रख सकते हैं। अपने यूरीन के रंग पर नजर रखें। गहरे रंग का यूरीन डीहाइड्रेशन की निशानी है। उसका रंग हल्का रखने के लिए अधिक मात्रा में पानी पिएं।
चिकनपॉक्स-
यह वेरीसेल्ला जोस्टर वायरस के संक्रमण से होने वाली बीमारी है। यह बहुत ही तेजी से फैलता है। इसमें बुखार आता है और शरीर पर दानें हो जाते हैं जिनमें तेज खुजली होती है। इसके अलावा, त्वचा में संक्रमण, निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन भी चिकनपॉक्स के आम लक्षण हैं।
बचने के लिए क्या करें-
बच्चों और युवाओं को इस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। चिकनपॉक्स छूने से बहुत तेजी से फैलता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि इसके निवारण के लिए 12 से 15 महीने की उम्र के बच्चों को चिकन पॉक्स का टीका और 4 से 6 वर्ष की उम्र के बीच दूसरा टीका लगवाना चाहिए।
टाइफाइड-
टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु से होने वाला संक्रामक रोग है। बच्चों को वयस्कों की तुलना में टाइफाइड होने की अधिक संभावना होती है। यह रोग 2 साल की उम्र के बच्चों से लेकर किसी को भी हो सकता है। इसमें लगातार बुखार रहना, भूख कम लगना, मुंह का स्वाद बिगड़ना, उल्टी होना और खांसी-जुकाम भी हो सकता है।
यह रोग आंतों, दिल, फेफड़ों, गुर्दें और मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।
पीलिया-
पीलिया एक विशेष प्रकार के वायरस से फैलता है। इसमें रोगी के मूत्र का रंग पीला हो जाता है। नाखून, त्वचा एवं आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है। रोगी को बेहद कमजोरी सी महसूस होती है और उसे अक्सर जी मिचलाना, सिरदर्द, भूख न लगना जैसे समस्याएं होती हैं।
कैसे फैलता है पीलिया-
लीवर का वायरस पहले आपके लीवर पर हमला करता है और उसके बाद यह पूरे शरीर में फैल जाता है। रोगी को इस बीमारी के दौरान उल्टी की शिकायत रहती है और दस्त संबंधी शिकायत भी हो जाती है। बीमारी के दौरान नब्ज धीमी हो जाती है। नींद न आना और कमजोरी आम हो जाता है। रोग पुराना हो जाने पर शरीर में भयानक खुजली भी हो सकती है।
रोग से बचने के लिए क्या करें-
पीलिया के दौरान खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है। हमें कुछ खास ध्यान रखने होते हैं जैसे कि हमें पानी उबालकर पीना चाहिए। चलते-फिरते रहने से वायरस का दुष्प्रभाव लिवर पर अधिक पड़ता है। इसलिए रोगी को कम से कम चलना-फिरना चाहिए। इस रोग में लिवर कोशिकाओं में ग्लाइकोजन और रक्त प्रोटीन की मात्रा घट जाती है। इसलिए कोई हल्का प्रोटीन भोजन, जैसे मलाईरहित दूध या प्रोटीनेक्स आदि लेना चाहिए। अपने हाथ थोड़ी-थोड़ी देर में धोते रहें। ऐसा करने से आप इन्फेकशन से दूर रह सकते हैं। खाना बनाते समय, खाना खाते समय और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से अपने हाथ धोएं। कच्चे फल और सब्जियां नहीं खाएं। गर्म खाना खाएं।