1. Hindi News
  2. लाइफस्टाइल
  3. जीवन मंत्र
  4. चारधाम यात्रा: केदारनाथ के खुले कपाट, जानें आखिर क्यों करें केदारनाथ के दर्शन साथ ही जानिए पौराणिक कथा

चारधाम यात्रा: केदारनाथ के खुले कपाट, जानें आखिर क्यों करें केदारनाथ के दर्शन साथ ही जानिए पौराणिक कथा

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : May 09, 2019 09:05 am IST,  Updated : May 09, 2019 09:06 am IST

Kedarnath temple: भोलेनाथ के भक्तों के लिये आज बेहद खास दिन हैं क्योंकि आज श्री केदारनाथ धाम के कपाट सुबह 5 बजकर 35 मिनट पर खुल चुके हैं। श्री केदारनाथ के मंदिर को बड़े ही भव्य तरीके से सजाया गया है। जानें पौराणिक कथा।

Kedarnath dham- India TV Hindi
Kedarnath dham

Kedarnath temple: भोलेनाथ के भक्‍तों के लिये आज बेहद खास दिन हैं क्‍योंकि आज श्री केदारनाथ धाम के कपाट सुबह 5 बजकर 35 मिनट पर खुल चुके हैं। श्री केदारनाथ के मंदिर को बड़े ही भव्‍य तरीके से सजाया गया है। कपाट खुलते के बााद से ही भोले बाबा के दरबार में दर्शन के लिए हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं की कतारें लगना शुरू हो गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार यहां सुबह 4 बजे से ही भक्‍तों का तांता लगना शुरू हो गया था। बाबा केदार की उत्सव डोली को मुख्य पुजारी केदार लिंग द्वारा भोग लगाने के साथ ही नित पूजाएं की गई, जिसके बाद डोली को सजाया गया। उसके बाद ठीक 5 बजकर 35 मिनट पर कपाट खोले गए। फिर डोली को अंदर मंदिर में प्रवेश करवाया गया। सर्वप्रथम पुजारियों व वेदपाठियों ने गर्भगृह में साफ सफाई की और फिर भोग लगाया गया।

ये भी पढ़ें- उत्‍तराखंड: हर-हर महादेव के जयघोष के बीच खुले केदारनाथ के कपाट, सैकड़ों किलो फूलों से हुआ श्रृंगार

यह मन्दिर एक 6 फीट ऊंचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है। मन्दिर में मुख्य भाग मण्डप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में नन्दी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं। मन्दिर का निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है, लेकिन हाँ ऐसा भी कहा जाता है कि इसकी स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी। प्रात:काल में शिव-पिण्ड को प्राकृतिक रूप से स्नान कराकर उस पर घी-लेपन किया जाता है। तत्पश्चात धूप-दीप जलाकर आरती उतारी जाती है। इस समय यात्री-गण मंदिर में प्रवेश कर पूजन कर सकते हैं, लेकिन संध्या के समय भगवान का श्रृंगार किया जाता है। उन्हें विविध प्रकार के चित्ताकर्षक ढंग से सजाया जाता है। भक्तगण दूर से केवल इसका दर्शन ही कर सकते हैं। केदारनाथ के पुजारी मैसूर के जंगम ब्राह्मण ही होते हैं।

केदारनाथ मंदिर को लेकर है ये मान्यता

इस ज्योतिर्लिंग के बारे में एक मान्यता प्रचलित है कि महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। इसके लिए वे भगवान शिव का आशीर्वाद पाना चाहते थे, लेकिन भगवान पांडवों से रुष्ट थे। भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पांडव काशी गए, वे उन्हें नहीं मिले। पांडव शिव को खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे। भगवान पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वह अंर्तध्यान होकर केदार में जा बसे। दूसरी ओर पांडव भी वे उनके पीछे-पीछे केदार पहुंच गए।

ये भी पढ़ें- कैलाश मानसरोवर यात्रा की आखिरी आवेदन तिथि 9 मई, देखें पूरी Detail

वहां शिव ने बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले। पांडवों को संदेह हो गया। भीम ने विशाल रूप धारण कर दो पहाड़ों पर पैर फैला दिए। सब गाय-बैल तो वहां निकल गए, लेकिन बैल बने भगवान शिव पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए।

भीम उस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में समाने लगा। भीम ने बैल की पीठ का भाग पकड़ लिया। इस पर भगवान शिव पांडवों की भक्ति देख कर प्रसन्न हो गए। उन्होंने दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। तब से भगवान शिव बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं।

मंदिर में मुख्य भाग में मंडप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में नंदी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं। मंदिर का निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है। कहा जाता है कि इसकी स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Religion से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें लाइफस्टाइल