ट्विशा शर्मा केस में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा की सास और आरोपी गिरिबाला सिंह को निचली अदालत की तरफ से दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों और गिरिबाला सिंह पर लगे आरोपों को देखते हुए उन्हें दी गई राहत सही नहीं थी। इसी वजह से अदालत ने पहले दी गई अग्रिम जमानत का आदेश खारिज कर दिया।
मामले की गंभीरता देखते हुए गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामले की गंभीरता और जांच से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है, इसलिए गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को रद्द किया जाता है। ट्विशा शर्मा केस मामले पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी भी की। हाईकोर्ट ने कहा कि व्हाट्सऐप चैट्स को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप सिर्फ समर्थ सिंह के खिलाफ हैं।
ट्विशा शर्मा पर था गर्भपात का दवाब
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा का गर्भपात कराया गया था। गवाहों के बयानों से साफ पता चलता है कि गिरिबाला सिंह और उनका बेटा ट्विशा को परेशान कर रहे थे और उस पर गर्भपात कराने का दबाव बना रहे थे। कई बयानों में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
निचली अदालत ने अहम तथ्यों पर ठीक से नहीं दिया ध्यान
आरोपी सास गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने मामले के अहम तथ्यों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया और जांच के शुरुआती दौर में ही जमानत दे दी। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद ही 12 मई 2026 को ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मामले में दहेज प्रताड़ना, गर्भपात के लिए दबाव और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं।
ट्विशा के परिजनों ने लगाए ये आरोप
सुनवाई के दौरान, मृतका ट्विशा शर्मा के परिवार की तरफ से कोर्ट में व्हाट्सऐप चैट्स पेश की गईं। इनमें ट्विशा ने अपने परिवार को बताया था कि पति और ससुराल वाले उस पर शक करते थे। ट्विशा पर गर्भ गिराने के लिए दबाव बना रहे थे। उसने यह भी कहा था कि उसे घर में चैन से रहने तक नहीं दिया जा रहा था।
आरोपी पक्ष जांच में नहीं कर रहा था पूरा सहयोग
सीबीआई और राज्य सरकार की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के कई निशान मिले हैं। CBI ने यह भी कहा कि आरोपी पक्ष जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रहा था और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी है। हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद गवाहों के बयान और व्हाट्सऐप चैट से यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप सिर्फ पति समर्थ सिंह के खिलाफ हैं। हाईकोर्ट ने माना कि मृतका पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया था और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ भी सीधे आरोप हैं।
गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी में अब कानूनी अड़चन नहीं
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि निचली अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध सबूतों को सही तरीके से नहीं परखा। इसी वजह से 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द किया जाता है। इसके साथ ही दोनों याचिकाओं का निपटारा कर दिया गया। गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार करने में अब सीबीआई को कोई कानूनी अड़चन नहीं है। सीबीआई अब कभी भी गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सीबीआई जांच पर पूरा भरोसा जता चुका है, इसलिए अब पूर्व जज और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है।
हाईकोर्ट ने CBI को भी बनाया है पार्टी
जान लें कि भोपाल कोर्ट से बीते 15 मई को गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिली थी। अग्रिम जमानत को खारिज करने के लिए एमपी सरकार और ट्विशा शर्मा के परिवारवालों ने याचिका दायर की थी। अभी सीबीआई, ट्विशा शर्मा केस की जांच कर रही है, इसलिए हाईकोर्ट ने सीबीआई को भी पार्टी बनाया है।
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