ट्विशा शर्मा की मौत के मामले की जांच चल रही है, जांच सीबीआई कर रही है। ट्विशा के शव की दोबारा पोस्टमॉर्टम की गई, उसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। इस बीच, आज हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट में सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता का तर्क था कि गिरिबाला सिंह को जिन आधार पर जमानत दी गई,उस तर्ज पर 90% लोगों को जमानत मिल जाएगी। FIR के पहले जमानत देने का क्या मतलब है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट में केस डायरी भी ठीक से नहीं देखी गई।
लंबी चली सुनवाई, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
तुषार मेहता ने कहा, गिरीबाला सिंह ने कानून की जानकार होने का उठाया फायदा, उन्हें पता था कि महिला से शाम को पूछताछ नहीं की जा सकती और इसीलिए गिरिबाला सिंह ने शाम को sho को मेल और व्हाट्सप मैसेज किया था। करीब पौने तीन घंटों तक जस्टिस देवनारायण मिश्रा की अदालत में दी जाती रही दलीलें, जिसमें कहा गया कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की जमानत निरस्त करने को लेकर मध्य प्रदेश सरकार और परिवार के वकीलों ने की जिरह, वकीलों ने मौत के बाद एफआईआर से लेकर जांच की खामियों को अदालत के सामने रखा। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सुरक्षित रखा फैसला।
ट्विशा के परिवार के वकील ने क्या कहा
एमपी हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में सुनवाई के बाद ट्विशा के परिवार के वकील का बयान सामने आया है। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा के अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा -"गिरिबाला की अग्रिम जमानत होनी चाहिए निरस्त, कोर्ट ने आदेश के लिए रखा है, कुछ देर में आदेश प्राप्त होगा, उम्मीद है कि हम सफल होंगे।"
आज कोर्ट में एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने ट्विशा शर्मा का पक्ष रखा और पति पत्नी दोनों के बीच बातचीत के चैट भी कोर्ट में किए गए पेश। ट्विशा की ओर से दलील दी गई कि मौत की सूचना मिलने के बात यदि मान ली जाए कि उसने आत्महत्या की, ऊपर यानी तीसरे फ्लोर से नीचे उतरने के बाद के लिए करीब 52 से 55 मिनट का समय बर्बाद किया गया तो कैसे मान जाए की या आत्महत्या है।
महाधिवक्ता की दलील...ट्विशा शर्मा के शरीर में कई जगह चोट के निशान थे, सीधे हाथ की उंगली में भी मिले चोट के निशान, ट्विशा शर्मा के एल्गो में भी चोट के निशान। दोबारा पीएम रिपोर्ट में हुआ खुलासा-ट्विशा की मौत के पहले ही थे चोट के निशान, ऐसे में पर्याप्त सुबूत होने के बाद भी ट्रायल कोर्ट से कैसे दी गई जमानत?
(जबलपुर से देवजीत देब की रिपोर्ट)
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