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MP में व्यापम जैसा अब सिपाही भर्ती परीक्षा घोटाला आया सामने, फर्जीवाड़े का तरीका सुन हिल जाएंगे आप

 Reported By: Anurag Amitabh, Edited By: Subhash Kumar
 Published : Jun 02, 2025 06:37 pm IST,  Updated : Jun 02, 2025 10:53 pm IST

मध्य प्रदेश में व्यापम के जैसे अब सिपाही भर्ती परीक्षा में घोटाला सामने आया है। 12 अगस्त से 12 सितंबर 2023 तक हुई एमपी सिपाही भर्ती परीक्षा में फर्जी कैंडिडेट्स ने आधार कार्ड में परीक्षा से पहले सॉल्वर के फोटो अपडेट कर दिए और फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है।

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मध्य प्रदेश में सिपाही भर्ती परीक्षा घोटाला। (सांकेतिक फोटो) Image Source : PTI/PEXELS

देशभर में भर्ती परीक्षा में घोटाले के लिए बदनाम व्यापम की तर्ज पर एक बार फिर से मध्य प्रदेश में सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा घोटाला सामने आया है। 2023 में हुई इन सिपाही भर्ती परीक्षाओं में कैंडिडेट्स ने परीक्षा से पहले आधार अपडेट कर सॉल्वर की फोटो लगाकर, उसे अपनी जगह एग्जाम में बिठाकर, फर्जीवाड़ा कर के आरक्षक के तौर पर सिलेक्ट हो गए। इसका खुलासा कैंडिडेट के दस्तावेजों की जांच के बाद हुआ। मामला सामने आने के बाद कई जिलों में पुलिस ने आरक्षकों खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

सबसे पहले ग्वालियर

ग्वालियर में आरक्षक भर्ती परीक्षा 2023 में फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। परीक्षा में मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी के पांच अभ्यर्थियों ने दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर अपने स्थान पर सॉल्वर से परीक्षा दिलाई थी। सिलेक्शन के बाद जब नियुक्ति के समय इनके आधार की हिस्ट्री चेक की गई तो गड़बड़ समझ में आई। व्यापम जिसका नाम बदलकर मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल रखा गया है उसने पूरा रिकॉर्ड तलब किया तो लिखित परीक्षा के आवेदन में फोटो और हैंड राइटिंग मिस मैच पाई गई। इसके बाद जांच कमेटी की शिकायत पर इस मामले में पांचों चयनित युवकों पर ग्वालियर के कंपू थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया है।

कब हुई थी परीक्षा?

  • मध्य प्रदेश में आरक्षक जीडी भर्ती परीक्षा- 2023  में 7411 पदों पर परीक्षा हुई थी।
  • ये परीक्षा -12 अगस्त से 12 सितंबर 2023 में हुई थी।
  • लिखित परीक्षा का रिजल्ट-7 मार्च 2024 को आया था 
  • फिजिकल टेस्ट 18 से 20 नवंबर 2024 को हुआ था।
  • परीक्षा में 9 लाख 67 हजार 118 फार्म भरे।
  • परीक्षा में 6 लाख 52 हजार 57 अभ्यर्थी शामिल हुए।
  • लिखित परीक्षा में 58 हजार पास हुए।
  • इसके बाद फिजिकल टेस्ट के बाद 7, 411 का सिलेक्शन हुआ।

कैसे सामने आया पूरा फर्जीवाड़ा?

आरक्षक भर्ती परीक्षा के बाद चयनित अभ्यर्थियों की सूची भी जारी हो गई थी। जारी की गई सूची में दीपक सिंह रावत निवासी जिला श्योपुर, उमेश रावत निवासी सबलगढ मुरैना, हक्के रावत निवासी नरवर जिला शिवपुरी, इमरान निवासी जौरा मुरैना, विवेक निवासी पोरसा, मुरैना का चयन हुआ था। अब नियुक्ति से पहले शासन के नियम का पालन करते हुए उसके आधार की हिस्ट्री खंगाली गई तो उसमें लिखित परीक्षा से पहले और बाद में कई बार इनके आधार की बायोमेट्रिक अपडेशन होने की बात सामने आई। जांच दल ने जब इन सभी पांच चयनित अभ्यर्थियों के आधार कार्ड की हिस्ट्री खंगाली तो पता लगा कि इन्होंने लिखित परीक्षा से पहले जुलाई 2023 में आधार अपडेट कराया। इसमें फर्जी परीक्षार्थी का फोटो अपडेट कराया गया। इसके बाद अगस्त-सितंबर 2023 को लिखित परीक्षा हुई थी। लिखित परीक्षा के कुछ दिन बाद इन्होंने फिर से अपना आधार में बायोमेट्रिक अपडेट कराया। 

जब इस मामले की जांच कर रही कमेटी ने मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल से लिखित परीक्षा से संबंधित दस्तावेज व रिकॉर्ड मांगा तो लिखित परीक्षा में आवेदन के फोटो और अभी के फोटो मैच नहीं किए। कॉपी पर लिखाई भी मैच नहीं हुई जिससे साफ था कि इनके द्वारा आधार पर बायोमेट्रिकल अपडेट में साॅल्वर का फोटो अपडेट कर किसी और से परीक्षा दिलाकर धोखाधड़ी की गई है। जब फर्जीवाड़ा साफ हुआ तो उप निरीक्षक रघुनंदन शर्मा 14 वीं वाहिनी विसबल ने कंपू थाना पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत की थी। इस पर मुरैना के तीन, शिवपुरी व श्योपुर के एक-एक अभ्यर्थी सहित कुल पांच अभ्यर्थियों पर लिखित परीक्षा में धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया गया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।

मुरैना में भी केंडिडेट ने किया फर्जीवाड़ा

ग्वालियर की तर्ज पर ही मुरैना में भी युवकों ने पुलिस आरक्षक बनने के लिये अपने स्थान पर सॉल्वर के माध्यम से भर्ती परीक्षा पास कर ली। इसके लिये आधार कार्ड में तीन बार बदलाव किया गया, लेकिन यह कड़ी मशक्कत भी उन्हें पुलिस की वर्दी नहीं दिलवा पाई। कूटरचित दस्तावेज के आधार पर राधाचरण व दिनेश द्वारा सहयोगी के माध्यम से उत्तीर्ण परीक्षा के बाद भी दस्तावेजों की जांच में पकड़ लिया गया। अब दोनों युवक दाखिले हवालात हैं। 

दरअसल, राजस्थान धौलपुर के मोरोली निवासी राधाचरण तथा भिण्ड गोरमी के सुकांड निवासी दिनेश सिंह ने आवेदन किया था। इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिये दोनों ने अपने आधारकार्ड में तीन-तीन बार बदलाव कराया। इन्होंने सॉल्वर व फिजीकल के लिये दूसरे युवक का उपयोग किया था। जांच के दौरान कूटरचित दस्तावेज के आधार पर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले राधाचरण तथा दिनेश के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। कोतवाली पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश कर 5 दिन के रिमांड पर इनसे निरंतर पूछताछ की जा रही है। दोनों से परीक्षा के दौरान सहयोग करने वालों की जानकारी ली जा रही है। इसमें मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी सहयोग मिलने की संभावना है। मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा 2023 में पुलिस द्वारा सॉल्वर तथा फिजीकल परीक्षार्थी की पहचान व तलाश की जा रही है।

राजगढ़ का मामला

राजगढ़ पुलिस ने आरक्षक भर्ती परीक्षा में जब चयनित सतेंद्र सिंह यादव उनके दस्तावेजों की जांच की तो पाया कि ग्वालियर के सत्येंद्र रावत ने सॉल्वर बनाकर उसकी जगह परीक्षा दी थी। बायोमैट्रिक फिंगरप्रिंट चार्ज के दौरान उसकी गड़बड़ी उजागर हुई।

कांग्रेस ने क्या कहा?

इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्टी के नेता उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा- "मध्य प्रदेश में आरक्षक घोटाला व्यापम सबसे बड़ा घोटाला है, यह व्यापम पार्ट 2 है। मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद गृहमंत्री हैं उन्हीं के पुलिस विभाग में घोटाला हो रहा है। हम इस मामले को विधानसभा में भी उठाएंगे और इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। ग्वालियर मुरैना राजगढ़ शिवपुरी अलीराजपुर पांच थानों में 16 रिपोर्ट हुई है।"

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