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ब्रिटिश सरकार को 'सेठ' ने दिया था कर्ज, 109 साल बाद पोता सूद समेत वसूलेगा; करोड़ों की देनदारी पर टिकी सबकी नजरें

 Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Feb 25, 2026 11:03 am IST,  Updated : Feb 25, 2026 11:03 am IST

दादा जुम्मा लाल के पोते विवेक रूठिया इस हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक दावे की बात है। अगर यह दावा कानूनी रूप से सफल होता है, तो यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय मामलों में से एक होगा।

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दादा द्वारा दिए हुए 109 साल पुराने उधार का हिसाब मांगने निकला पोता। Image Source : REPORTER INPUT

आपने कभी सुना है कि किसी भारतीय परिवार ने ब्रिटिश हुकूमत को ही कर्ज दे दिया हो? तो चौंकिए मत क्योंकि मध्य प्रदेश के सीहोर से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। 109 साल पहले दिया गया 35 हजार का कर्ज और अब उसका हिसाब होगा सूद समेत! आइए बताते है आखिर क्या है पूरा मामला।

तो यह कहानी शुरू होती है प्रथम विश्व युद्ध के दौर में, जब भोपाल रियासत की नवाब सुल्तान जहां बेगम के बाद प्रदेश के दूसरे सबसे अमीर शख्स सेठ जुम्मा लाल रूठिया ने ब्रिटिश हुकूमत को उनके मैनेजमेंट के लिए 35 हजार रुपये का कर्ज दिया था। आज के दौर में 35 हजार मामूली लग सकते हैं, लेकिन 1917 में यह रकम करोड़ों के बराबर थी।

109 साल पुराने उधार का हिसाब मांगने निकला पोता

अंग्रेज देश छोड़कर चले गए, हुकूमतें बदल गईं, लेकिन सीहोर के इस रईस परिवार के पास आज भी वो 'दस्तावेज' मौजूद हैं, जो गवाही देते हैं उस ऐतिहासिक लेनदेन की। दादा जुम्मा लाल के पोते विवेक रूठिया इस हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। विवेक रठिया का कहना है, "मेरे दादाजी ने यह राशि ब्रिटिश सरकार को दी थी। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, एक संप्रभु राष्ट्र अपने पुराने कर्जों को चुकाने के लिए बाध्य है। हम अब ब्रिटिश क्राउन को लीगल नोटिस भेज रहे हैं।"

1917 की रसीद और लिखा-पढ़ी आज भी सुरक्षित

आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस रूठिया परिवार की हम बात कर रहे हैं, कहा जाता है कि सीहोर शहर की 40 से 45 फीसदी जमीन आज भी उन्हीं के नाम पर है। इंदौर से लेकर भोपाल तक इस परिवार की संपत्तियां फैली हुई हैं। 1917 की वो रसीद और लिखा-पढ़ी आज भी सुरक्षित है।

करोड़ों की देनदारी पर टिकीं सबकी नजरें

करोड़ों की इस देनदारी पर अब सब की नजरें टिकी हैं। क्या ब्रिटेन का शाही परिवार सीहोर के इस परिवार का कर्ज लौटाएगा? यह सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक दावे की बात है। अगर यह दावा कानूनी रूप से सफल होता है, तो यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय मामलों में से एक होगा। 

(रिपोर्ट- राहुल मालवीय)

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