महाराष्ट्र के अहमदनगर में आदमखोर तेंदुए का आतंक जारी है। संगमनेर तहसील में तेंदुए के हमले में एक 4 साल के बच्चे की मौत हो गई है। घटना शनिवार शाम की है। यह चार साल का बच्चा अपने घर के चौखट पर खड़ा था। घर के बाहर बच्चे की दादी काम कर रही थी। इसी दौरान तेंदुआ आया और बच्चे को उठा ले गया। इस आदमखोर तेंदुए की तस्वीरें सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गईं। बच्चे की मौत के बाद गांव वाले काफी आक्रोश में है। गांव वालों ने तेंदुए का एनकाउंटर करने की मांग की है।
दो दिन पहले ही अहमदनगर में तेंदुओं को पकड़ने के लिए 200 पिंजरे लाए गए हैं। इस बीच बच्चे के परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया था। हालांकि, जब प्रशासन की तरफ से नरभक्षी तेंदुए को मारने का आदेश जारी हुआ तो उन्होंने शव लिया। रविवार को मृतक बच्चे सिद्धेश कडलग का अंतिम संस्कार किया गया। वन विभाग द्वारा नरभक्षक तेंदुए की तलाश जारी है।
शिरपुर तालुका के भरवाड़े इलाके में एक सूखे कुएं में गिरे तेंदुए को सुरक्षित बाहर निकालने में वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। करीब 11 घंटे चले लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद, देर रात तेंदुए को डार्ट (बेहोशी का इंजेक्शन) मारकर बेहोश किया गया और फिर उसे पिंजरे में कैद कर लिया गया। घटना भरवाड़े और अर्थे गांव के बीच स्थित दिलीप गिरधर पटेल के खेत की है, जहां एक सूखे कुएं में तेंदुआ गिर गया था। ग्रामीणों ने जब तेंदुए को कुएं में देखा, तो तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही सांगवी और बोराड़ी वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और दोपहर से ही तेंदुए को बाहर निकालने के प्रयास शुरू कर दिए गए।
करीब 35 फीट गहरे सूखे कुएं में गिरने के कारण तेंदुआ काफी थक चुका था। वन विभाग की टीम ने उसे पिंजरे में लाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन तेंदुआ पिंजरे में नहीं आ रहा था, जिससे टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अंततः, 10-11 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद, वन विभाग ने तेंदुए को डार्ट मारकर बेहोश करने का फैसला किया। जैसे ही तेंदुआ बेहोश हुआ, वनकर्मी कुएं में उतरे और उसे सुरक्षित पिंजरे में डालकर बाहर निकाला। इस रेस्क्यू ऑपरेशन को देखने के लिए आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई थी।
सतारा तालुका के मट्टियापुर के बरद शिवर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। किसान रवींद्र अबाज़ी घोरपड़े के गन्ने के खेत में चारों पैर टूटी मादा तेंदुए का शव मिला, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। वन विभाग ने प्रारंभिक अनुमान लगाया है कि तेंदुए की मौत लगभग तीन से चार दिन पहले हुई होगी। घोरपड़े के खेत में पिछले चार दिनों से गन्ने की कटाई का काम चल रहा था। शुक्रवार, 12 तारीख की सुबह, जब मजदूर गन्ना काट रहे थे, तो उन्होंने खेत के दूसरे छोर पर एक घने और फिसलन भरे इलाके में तेंदुए का शव देखा। इस अचानक दृश्य को देखकर मजदूर भयभीत हो गए और उन्होंने तुरंत खेत मालिक को सूचना दी। घटना की सूचना मिलते ही वन रेंज अधिकारी संदीप जोपले और वन अधिकारी अभिजीत कुम्भार मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया। वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया गया। यह स्पष्ट हो गया है कि तेंदुआ मादा है। उसके चारों पैर पंजों से कटे हुए हैं और कुल 18 नाखून गायब हैं।
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