नागपुर पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय गैंग का पर्दाफाश किया है। पूरे भारत के लगभग 21 राज्यों की पुलिस को इस अंतर्राष्ट्रीय गैंग की तलाश थी। इस गैंग ने लगभग भारत के सभी राज्यों में अपनी पैठ जमा ली थी और 20 करोड़ से ज्यादा के कैश ट्रांजैक्शंस अलग-अलग अकाउंट से अपने अकाउंट में किए थे। नागपुर पुलिस ने अब तक इस मामले में 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया है एवं दो अन्य की तलाश कर रही है। जैसे ही इन आरोपियों के गिरफ्तारी की खबर भारत के अन्य राज्यों की पुलिस को मिली, वे भी नागपुर पुलिस के बाद अब आरोपियों को गिरफ्तार करने की तैयारी में है। इस बात की जानकारी नागपुर के पुलिस आयुक्त डॉ रविंद्र सिंगल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस मे दी है। इस गिरोह के खिलाफ भारत के 21 राज्यों में लगभग 200 के आसपास मामले दर्ज किए गए हैं।
कैसे करते थे धोखाधड़ी?
आरोपियों का धोखाधड़ी का करने का अंदाज काफी चौंकाने वाला सामने आया है। वह जान पहचान के व्यक्ति और संपर्क में आने वाले मजदूर को यह कहकर बरगलाते थे कि पार्टनरशिप में बिजनेस शुरू करेंगे। इन लोगों का विश्वास जीतने के बाद उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, आदि महत्वपूर्ण दस्तावेज प्राप्त करते थे, फिर उनके नाम से संबंधित बैंक खाता खोलते थे। खाता धारकों को यह जानकारी नहीं होती थी कि इतनी बड़ी रकम उनके अकाउंट में किसी ने जमा किया और किसने निकाला। उन्हें कमीशन के तौर पर 20 से ₹25000 थमा दिए जाते थे। उन खातों मे हवाला, बेटिंग, ऑनलाइन गेमिंग और अन्य गैर कानूनी करोड़ों रुपए का ट्रांजैक्शन करते थे।
विदेश भेजे जा रहे थे पैसे
हवाला, ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और क्रिप्टो करेंसी से ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय रैकेट द्वारा किराए के बैंक खातों की राशि अवैध मार्ग से विदेश भेजी जा रही थी। नागपुर की क्राइम ब्रांच पुलिस ने इन आरोपियों को धरदबोचा है। यह किसी भी राज्य की पुलिस की सबसे बड़ी गिरफ्तारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरे गिरोह में 28 लोग का समावेश है, जिनमें से अब तक पुलिस ने 23 को गिरफ्तार कर लिया है। नागपुर पुलिस ने आरोपियों के पास से सिम कार्ड, बड़ी मात्रा में मोबाइल जब्त किया है और लगभग 54 लाख रुपए की राशि फ्रीज की गई है। इस रैकेट द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों में 20 करोड़ से अधिक राशि जमा हुई है और यह लगभग 70 से 75 किराए के खाते संचालित कर रहे हैं। पुलिस लेनदेन की राशि अधिक होने की बात भी कर रही है।
चीन और कंबोडिया तक फैले हुए गिरोह के तार
नागपुर के पुलिस कमिश्नर डॉक्टर रविंद्र सिंगल ने बताया है कि ये सभी आरोपी पुलिस से बचने के लिए समय-समय पर अपना ठिकाना बदलते रहते थे। ये आरोपी एक जगह तीन से चार दिन रहते थे, उसके बाद वह अपना ठिकाना बदल देते थे और सभी आरोपी एक जगह बैठकर इस प्रकार की घटना को अंजाम देते थे। इन आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र में लगभग 25 मामले अलग-अलग जिलों में दर्ज किए गए हैं। इस गिरोह के तार चीन और कंबोडिया तक फैले हुए थे। भारत का पैसा यह गिरोह विदेश में कैसे भेजता था, कैसे ट्रांसफर करता था, इसकी जांच भी नागपुर पुलिस की आर्थिक शाखा कर रही है।
कैसे फूटा गिरोह का भांडा?
पुलिस आयुक्त ने बताया है कि इस रैकेट का ऑपरेशन टेलीग्राम एप द्वारा संचालित किया जाता था। सट्टेबाजी, ऑनलाइन गेमिंग, हवाला, क्रिप्टो करेंसी की राशि जब इस अकाउंट में जमा होती थी, इस राशि को कंबोडिया और चीन भेजा जाता था। लोगों को पार्टनर बनाकर धंधे करने का झांसा देखकर दस्तावेज एकत्र करते थे। इस दस्तावेज का आधार पर बैंक में खाता खोलकर करोड़ों रुपये का इस्तेमाल करते थे। महाराष्ट्र के गोंदिया जिले एक खाताधारक के अकाउंट में 1 करोड 73 लाख रुपये का अमाउंट आया तो उसने नागपुर पुलिस को इसकी सूचना दी। उसी आधार पर पुलिस ने गोंदिया एवं नागपुर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में आरोपियों के किराए के बैंक खातों को संचालित करने वाले रैकेट से जुड़े होने का खुलासा हुआ।
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