पिछले कई दिनों से मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में जबरदस्त हंगामा चल रहा है। सरकार के द्वारा इस विवाद को सुलझाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन बात बन नहीं पाई। इसके बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में इस मामले को एलकार विस्तार से बात हुई और कई फैसले लिए गए। जानकारी के अनुसार, जालना में हुए आंदोलन में आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएंगे। साथ ही, राज्य भर में मराठा आरक्षण आंदोलन के संबंध में जो भी आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं उन्हें भी वापस लिया जा सकता है।
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कमिटी में जरंगे पाटिल के लोगों को भी शामिल किया जाएगा
इस बैठक में फैसला हुआ है कि इस मामले को लेकर सरकार की तरफ से गठित की गई रिटायर्ड जज शिंदे कमिटी को थोड़ा समय दिया जाए। सरकार ने आंदोलन समिति से एक महीने का समय मांगा है। इसके साथ ही बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया है कि मनोज जरंगे पाटिल अनशन और आंदोलन ख़त्म करें। इसके साथ ही कमिटी में जरंगे पाटिल के लोगों को भी शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज करने वाले तीन अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है। इस बैठक में किसी दूसरे समाज का आरक्षण कम किए बिना मराठा समाज को आरक्षण देने पर चर्चा हुई है। इसके साथ ही आरक्षण दिए जाने पर कानून के जानकारों से राय ली जाएगी और एक टास्क फ़ोर्स भी गठित की जाएगी।
मराठा आरक्षण पर चर्चा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक पर महाराष्ट्र कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने कहा कि "मेरी पार्टी और मेरा मानना है कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इस मामले में सरकार और मुख्यमंत्री की तरफ से जो भी सकारात्मक पहल की जाएगी, उसका हम समर्थन करेंगे।