लातूर: NEET परीक्षा पेपर लीक मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में जुटी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शिवराज मोटेगांवकर की गिरफ्तार के बाद जांच के दायरे में आए उनके कोचिंग 'RCC इंस्टीट्यूट' को लेकर बहुत बड़ा खुलासा किया है।
जांच में सामने आया है कि NEET पेपर लीक मामले में आरोपी शिवराज मोटेगांवकर पेपर लीक का बिजनेस पूरे प्रोफेशनल तरीके से करता था। 2024 और 2025 का लातूर का NEET रिजल्ट भी सवालों के घेरे में है। पहले काम फिर पैसा- 5, 10, 15, 20, 25, 30 लाख के ऊपर की डीलिंग होती है, कुछ डॉक्टर और अभिभावक ब्लैंक चेक तक देने को तैयार थे।
लातूर का RCC इंस्टीट्यूट सबसे पहले बच्चों को उनकी हैसियत के हिसाब चुनाव करता है। फिर उनके अभिभावकों को अप्रोच किया जाता। इतना ही नहीं... अभिभावकों को यह गारंटी दी जाती कि उनके बच्चों का सेलेक्शन बिल्कुल तय रहेगा... जब पेपर हो जाए और एग्जाम के बाद यह सुनिश्चित हो जाएगा कि इंस्टीट्यूट के क्वेश्चन बैंक से ही पेपर आए थे, उसके बाद ही पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे... उसके पहले अभिभावकों ने इंस्टीट्यूट को एक टोकन मनी दी। एजेंसी सूत्रों की मानें तो एग्जाम के बाद कई अभिभावकों की यह भी शिकायत थी कि इंस्टीट्यूट द्वारा मुहैया कराए गए क्वेश्चन बैंक और फिजिक्स के पेपर अलग थे।
डॉक्टरों के लिए अलग सुविधा
वहीं, लातूर और अन्य जिलों के डॉक्टरों के लिए अलग सुविधा थी। इस पूरे मामले की प्राथमिक जांच से जुड़े लातूर के एक अधिकारी ने बताया कि कई डॉक्टरों के बच्चे इस इंस्टीट्यूट में पढ़ते हैं और उनकी चाहत होती है कि उनका बेटा भी डॉक्टर बने, इसके लिए वह कोई भी रकम देने के लिए तैयार होते हैं। ऐसे में कई डॉक्टर जांच एजेंसियों की रडार पर हैं, जिन्होंने अपने बच्चों के लिए पेपर खरीदे।
2025 के नीट रिजल्ट को लेकर खुलासा
इससे पहले, RCC इंस्टीट्यूट को लेकर ये खुलासा हुआ था कि साल 2025 में 21 स्टूडेंट्स का NEET में सेलेक्शन हुआ था। इनमें से 19 स्टूडेंट्स को AIIMS संस्थानों में दाखिला मिला था, जबकि 2 स्टूडेंट्स को मुंबई के KEM अस्पताल में एडमिशन मिला था।
लातूर के प्रीवियस रिकॉर्ड्स पर सवाल
RCC इंस्टीट्यूट को लातूर का एक प्रीमियम इंस्टीट्यूट माना जाता है,जहां हजारों की संख्या में बच्चे हर साल NEET परीक्षा के लिए खुद को इनरोल करते हैं। 2024 के NTA डेटा के अनुसार, लातूर से नीट 2024 परीक्षा में शामिल हुए 24,496 छात्रों में से 1,245 छात्रों ने 600 से अधिक अंक हासिल किए। इनमें से 376 छात्रों ने 650 अंकों का आंकड़ा पार किया, जिसे आमतौर पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आवश्यक माना जाता है। इसके अलावा, 25 छात्रों ने 700 से अधिक अंक प्राप्त किए, जबकि पांच छात्रों ने दुर्लभ माने जाने वाले 710 अंकों के स्तर को भी पार कर लिया।
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