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2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना संभव नहीं, पूर्व RBI गवर्नर ने जताई आशंका

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Oct 08, 2021 03:14 pm IST,  Updated : Oct 08, 2021 03:24 pm IST

RBI के पूर्व गवर्नर के अनुसार 2,700 अरब डॉलर से 5,000 अरब डॉलर पर पहुंचने के लिए अर्थव्यवस्था को लगातार पांच साल तक नौ प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करनी होगी

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'5 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य दूर' Image Source : PIXABAY

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने के लिये सरकार एक साथ कई लक्ष्य लेकर चल रही है। जिसमें से एक लक्ष्य था कि भारत की अर्थव्यवस्था को 2024-25 तक 5,000 अरब डॉलर यानि 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना। प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2019 में ये सपना देखा था और फिलहाल अभी भी सरकार आश्वस्त है कि वो इस सपने को पूरा कर लेगी। हालांकि दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय अर्थव्यवस्था का इस सीमा तक पहुंचाना असंभव है।  उनके मुताबिक कोविड से पहले ऐसा संभव था लेकिन अब यह संभव नहीं है।

क्या है पूर्व गवर्नर की राय  

आईसीएफएआई फाउंडेशन फोर हायर एजुकेशन के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए रंगराजन ने कहा, ‘‘कुछ साल पहले यह उम्मीद थी कि भारत 2025 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। अब यह असंभव है। 2019 में भारतीय अर्थव्यवस्था 2,700 अरब डॉलर की थी। मार्च, 2022 के अंत तक हम इसी स्तर पर होंगे। 2,700 अरब डॉलर से 5,000 अरब डॉलर पर पहुंचने के लिए अर्थव्यवस्था को लगातार पांच साल तक नौ प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करनी होगी।’’ उन्होंने कहा कि 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए वृद्धि सरकार की सबसे बड़ी चिंता होनी चाहिए। यह कई सामाजिक आर्थिक समस्याओं का हल भी है। इक्विटी भी महत्वपूर्ण है, लेकिन सुधारों के जरिये ऊंची वृद्धि को समर्थन के बिना यह दूर की कौड़ी है। रंगराजन ने कहा, ‘‘राजस्व में सुधार के साथ खर्च भी बढ़ाया सकता है, क्योंकि राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 6.8 प्रतिशत के बजट लक्ष्य से नीचे लाने की कोई जरूरत नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि भारत को पिछले दो साल के दौरान उत्पादन में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए तेज वृद्धि की जरूरत है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व चेयरमैन ने कहा कि कोविड-19 पर अंकुश के लिए लगाए गए लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह ठहर गई थीं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन अंकुशों में ढील के बाद अब अर्थव्यवस्था ने फिर से रफ्तार पकड़ना शुरू किया है। रंगराजन ने कहा कि कोविड-19 की तीसरी लहर के प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिए प्रयास किए जाने चाहिये यदि ऐसा होता है, तो टीकाकरण का दायरा बढ़ाने के साथ कुल बुनियादी ढांचा निवेश के तहत स्वास्थ्य ढांचे पर निवेश बढ़ाने की जरूरत होगी।

किस रफ्तार से बढ़ी है भारत की अर्थव्यवस्था
आंकड़ों की माने तो भारत की अर्थव्यवस्था को पहले 1 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 55 साल लगे थे। हालांकि साल 2014 से 2019 के बीच अर्थव्यवस्था ने और 1 लाख करोड़ डॉलर जोड़े हैं। इसी रफ्तार को देखते हुए साल 2019 में प्रधानमंत्री मोदी ने 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा था। हालांकि कोरोना संकट की वजह अर्थव्यवस्था ने वक्त और रफ्तार दोनो गंवा दिया जिसकी वजह से अब जानकार इस लक्ष्य को असंभव मान रहे हैं।  

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