अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर रेगुलेटरी जांच और भी सख्त हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की लगातार जांच के बाद, अब कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने भी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और सीएलई प्राइवेट लिमिटेड समेत ग्रुप की कई कंपनियों में फंड्स के कथित हेराफेरी की एक नई जांच शुरू कर दी है।
गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को सौंपा गया मामला
इंडिया टुडे को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, MCA की प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर पैसों की हेराफेरी और कंपनी अधिनियम के तहत बड़े उल्लंघनों का संकेत मिलने के बाद, अब गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को मामला सौंप दिया गया है। SFIO द्वारा रिलायंस ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों में फंड्स के प्रवाह की जांच और सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर जिम्मेदारी तय करने की उम्मीद है। जांच के परिणामों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
ईडी ने भी रिलायंस ग्रुप के खिलाफ तेज की कार्रवाई
MCA ने ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईडी ने कर्ज में डूबे रिलायंस ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इस हफ्ते की शुरुआत में, ईडी ने रिलायंस ग्रुप की कंपनियों की लगभग 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं। ईडी ने 31 अक्टूबर को धन शोधन निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत ग्रुप की 42 संपत्तियों को कुर्क करने के लिए चार अलग-अलग अस्थायी आदेश जारी किए। इसमें अनिल अंबानी के मुंबई के पाली हिल स्थित पारिवारिक घर के अलावा उनकी कंपनियों की अन्य आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां भी शामिल हैं।
रिलायंस कम्युनिकेशंस और उससे संबंधित कंपनियों के मामलों में हुई है कुर्की
ये कुर्की रिलायंस कम्युनिकेशंस और उससे संबंधित कंपनियों से जुड़े मामलों से जुड़ी है। ये मामले 2017 और 2019 के बीच येस बैंक से लिए गए लोन का कथित रूप से दुरुपयोग करने से संबंधित हैं। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर ये स्पष्ट करना चाहती हैं कि दोनों कंपनियों के संचालन, प्रदर्शन या भविष्य की संभावनाओं पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है। शेयर बाजार को दी गई सूचना के अनुसार, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर दोनों ही सामान्य रूप से काम कर रही हैं।



































