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अनिल अंबानी को ED ने दिया जोरदार झटका! रिलायंस ग्रुप के खिलाफ मामले में ₹1,452 करोड़ की नई संपत्तियां कुर्क

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Nov 20, 2025 07:24 pm IST,  Updated : Nov 20, 2025 08:08 pm IST

रिलायंस ग्रुप के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ईडी ने यह कार्रवाई की है। इससे पहले भी ईडी इस मामले में ₹7,500 करोड़ की संपत्तियां अटैच कर चुकी है।

अनिल अंबानी।- India TV Hindi
अनिल अंबानी। Image Source : PTI

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को बताया कि उसने कारोबारी अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ₹1,452 करोड़ से अधिक मूल्य की नई संपत्तियां अटैच की हैं। एजेंसी के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जारी अस्थायी आदेश में नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (डीएकेसी) और मिलेनियम बिज़नेस पार्क की कई इमारतें, और पुणे, चेन्नई और भुवनेश्वर में स्थित प्लॉट और इमारतें शामिल हैं।

पहले भी ₹7,500 करोड़ की संपत्तियां हुई हैं कुर्क

पीटीआई की खबर के मुताबिक, ईडी ने बताया कि ये संपत्तियां, जिनकी कीमत ₹1,452.51 करोड़ आंकी गई है, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) और उसकी संबद्ध कंपनियों की हैं। इससे पहले भी ईडी इस मामले में ₹7,500 करोड़ की संपत्तियां अटैच कर चुकी है। यह पूरा मामला कथित बैंक लोन धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। ग्रुप के सूत्रों ने पहले बताया था कि डीएकेसी, आरकॉम की संपत्ति है और कंपनी पिछले छह वर्षों से दिवालियापन प्रक्रिया (इन्सॉल्वेंसी) में है। इस नई कार्रवाई के बाद रिलायंस ग्रुप के खिलाफ ईडी द्वारा अटैच की गई कुल संपत्तियों का आंकड़ा बढ़कर ₹8,997 करोड़ हो गया है।

ईडी के गंभीर आरोप

एजेंसी का आरोप है कि 2010 से 2012 के बीच आरकॉम और उसकी समूह कंपनियों ने देशी और विदेशी बैंकों से बड़ी मात्रा में लोन लिए, जिनमें कुल ₹40,185 करोड़ का बकाया था। ईडी के मुताबिक, नौ बैंकों ने इन लोन खातों को फ्रॉड घोषित किया है। एक कंपनी द्वारा एक बैंक से लिया गया लोन दूसरी कंपनियों के लोन चुकाने, संबंधित पार्टियों को ट्रांसफर करने और म्यूचुअल फंड में निवेश करने में इस्तेमाल किया गया, जो लोन की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है।

बिल डिस्काउंटिंग का बड़े स्तर पर दुरुपयोग

जांच में आगे सामने आया कि ₹13,600 करोड़ से अधिक राशि लोन की एवरग्रीनिंग (पुराने कर्ज छिपाने) में उपयोग की गई। ₹12,600 करोड़ संबंधित कंपनियों को ट्रांसफर किए गए और ₹1,800 करोड़ से अधिक फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए, जिन्हें बाद में समूह की कंपनियों में री-रूट किया गया। एजेंसी ने यह भी कहा कि बिल डिस्काउंटिंग का बड़े स्तर पर दुरुपयोग कर फंड्स को संबंधित इकाइयों तक पहुंचाया गया। साथ ही, कुछ लोन राशि को विदेशों में भेजी गई रेमिटेंस के जरिए बाहर साइफन किया गया।

रिलायंस ग्रुप ने जारी किया स्पष्टीकरण

हालांकि, इस खबर को लेकर रिलायंस ग्रुप ने गुरुवार को स्पष्ट किया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कुर्क की गई सभी संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) की हैं, जो वर्ष 2019 से ही रिलायंस ग्रुप का हिस्सा नहीं रही है, यानी पिछले छह वर्षों से रिलायंस ग्रुप से उसका कोई संबंध नहीं है। आरकॉम पिछले छह साल से अधिक समय से कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) के तहत है। कंपनी के सभी रिजॉल्यूशन से जुड़े मामले वर्तमान में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) और माननीय सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में विचाराधीन हैं।

वर्तमान में आरकॉम का प्रबंधन एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा किया जा रहा है, जिसकी देखरेख एनसीएलटी और क्रेडिटर्स की समिति (सीओसी) कर रही है। इस समिति का नेतृत्व भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और बैंकों/ऋणदाताओं के कंसोर्टियम के पास है। अनिल धीरूभाई अंबानी का रिलायंस कम्युनिकेशंस से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने वर्ष 2019 में ही कंपनी से इस्तीफा दे दिया था। यह कुर्की आदेश रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर के परिचालन, प्रदर्शन या भविष्य की योजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा। दोनों कंपनियां पूरी तरह सामान्य रूप से काम कर रही हैं और विकास, परिचालन उत्कृष्टता तथा सभी हितधारकों, विशेष रूप से 50 लाख से अधिक शेयरधारकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर पूरी तरह केंद्रित हैं। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि अनिल धीरूभाई अंबानी पिछले साढ़े तीन वर्षों से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर के निदेशक मंडल में भी नहीं हैं।

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