अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे को लेकर गुरुवार को केंद्र सरकार ने एक बड़ा बयान दिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पायलट को दोषी नहीं ठहराया गया है। मंत्रालय का कहना है कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस मामले को लेकर फैलाई जा रही गलतफहमियों को दूर करने के लिए यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है।
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यह बयान ऐसे समय पर आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, डीजीसीए (DGCA) और अन्य संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता पुष्कर राज सभरवाल द्वारा दायर एक याचिका पर जारी हुआ है, जिसमें हादसे की निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सटीक जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि इस जांच की निगरानी एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाए ताकि किसी तरह की पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट न बने।
सुप्रीम कोर्ट का भरोसा
सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने दिवंगत पायलट के पिता को आश्वस्त करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, लेकिन आपको यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि आपके बेटे को दोषी ठहराया जा रहा है… कोई भी यह नहीं मानता कि यह पायलट की गलती थी।” न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची ने भी कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट में कहीं भी पायलट की गलती का उल्लेख नहीं किया गया है।
12 जून का भीषण हादसा
गौरतलब है कि 12 जून 2023 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 241 यात्री और 19 क्रू मेंबर शामिल थे। प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया था कि विमान के दोनों इंजन के फ्यूल स्विच रन से कटऑफ मोड में अचानक बदल गए, जिससे पावर सप्लाई रुक गई और विमान गिर गया। हालांकि शुरुआती अमेरिकी जांच में यह आशंका जताई गई थी कि संभवतः पायलट ने ही ईंधन का फ्लो बंद किया, लेकिन परिवार और पायलट यूनियन का दावा है कि इसके पीछे तकनीकी खराबी या सिस्टम फेल्योर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।