क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CareEdge की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) अपनी दिसंबर मौद्रिक नीति समीक्षा में 25 बेसिस पॉइंट की रेपो रेट कटौती का फैसला कर सकता है। एजेंसी का कहना है कि तेज़ी से गिरती महंगाई और मजबूत आर्थिक वृद्धि ने इस कदम के लिए पर्याप्त नीति-गत गुंजाइश पैदा कर दी है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, अक्टूबर में खुदरा महंगाई (सीपीआई) घटकर 0.3% पर आ गई, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है। यह RBI के 4% लक्ष्य से काफी नीचे है। वर्तमान में रेपो रेट 5.5% पर है।
महंगाई काबू में रहने की मुख्य वजहें
CareEdge के अनुसार, आने वाले महीनों में महंगाई को निम्न स्तर पर बनाए रखने में ये कारक अहम भूमिका निभाएंगे:
- ब्रेंट क्रूड की स्थिर कीमतें
- जलाशयों में पर्याप्त जल, जिससे रबी फसल की बुवाई मजबूत
- चीन में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, जिससे वैश्विक कीमतों पर दबाव
GDP ग्रोथ मजबूत लेकिन आगे थोड़ी सुस्ती की आशंका
रिपोर्ट बताती है कि 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की GDP वृद्धि 8.2% रही है। हालांकि, CareEdge ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में यह वृद्धि घटकर करीब 7% रह सकती है। इसका कारण है-शुरुआती महीनों में तेज़ हुए निर्यात का प्रभाव धीरे-धीरे कम होना, त्योहारों के बाद उपभोग (कंजम्प्शन) का सामान्य स्तर पर लौटना और पूरे FY26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.5% रखना है।
रेपो रेट कटौती की नीतिगत वजहें
CareEdge का कहना है कि अगले 12 महीनों में औसत सीपीआई महंगाई लगभग 3.7% रहने की संभावना है। इसकी तुलना में वर्तमान रियल पॉलिसी रेट लगभग 1.8% बैठता है, जो न्यूट्रल रेंज 1–1.5% से अधिक है। यानी RBI के पास मौद्रिक ढील की पर्याप्त गुंजाइश है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की स्थिति मजबूत
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताओं की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनी हुई है। मध्य नवंबर तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 27 अरब डॉलर बढ़कर 693 अरब डॉलर पर पहुंच गया। दिसंबर पॉलिसी में रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई दिसंबर बैठक में वित्तीय वर्ष 2026 के लिए महंगाई अनुमान घटाकर लगभग 2.1% और जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.5% कर सकता है।






































