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IMF से कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन को सरकार ने कार्यकाल खत्म होने से पहले ही बुलाया, आखिर क्यों?

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : May 04, 2025 12:04 pm IST,  Updated : May 04, 2025 12:04 pm IST

सुब्रमण्यन की यह विदाई 9 मई को आईएमएफ की बैठक से पहले हो गई है। 9 मई को आईएमएफ की अहम बैठक होने वाली थी, जिसमें पा​किस्तान को अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर फैसला होने वाला था।

Krishnamurthy V Subramanian- India TV Hindi
कृष्णमूर्ति वी सुब्रमण्यन Image Source : PTI

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत के कार्यकारी निदेशक (ED) के पद पर अपनी सेवा दे रहे अर्थशास्त्री कृष्णमूर्ति वी सुब्रमण्यन को सरकार ने टेन्योर पूरा होने से 6 महीने पहले ही बुला लिया है। उनका कार्यकाल 3 साल के लिए था जिसे पूरा होने में अभी छह महीने बचा था। हालांकि, सरकार ने कार्यकाल पूरा होने से पहले बुलाने की वजह नहीं बताई है। सुब्रमण्यन को अगस्त 2022 में IMF में नियुक्त किया गया था। 1 नवंबर, 2022 को उन्होंने कार्यभार संभाला था, जिसमें उन्होंने फंड के कार्यकारी बोर्ड में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान का प्रतिनिधित्व किया था। इससे पहले, उन्होंने 2018 से 2021 तक भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में कार्य किया था। 

आखिर जल्दी बुलाने की क्या हो सकती है वजह?

सरकार ने आधिकारिक तौर पर सुब्रमण्यन को पहले बुलाने की  कोई कारण नहीं बताया है। हालांकि, जानकारों और मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि डेटा मुद्दों पर IMF के साथ तनाव के बाद यह फैसला लिया गय है। सुब्रमण्यन ने IMF डेटासेट की गुणवत्ता और विश्वसनीयता के बारे में चिंता जताई थी। कथित तौर पर ये आपत्तियां वाशिंगटन स्थित बहुपक्षीय एजेंसी के अधिकारियों को पसंद नहीं आईं। दूसरी वजह उनकी किताब को माना जा रहा है। सुब्रमण्यन की हाल की पुस्तक इंडिया @ 100 के प्रचार और प्रसार को कुछ लोगों ने आईएमएफ में उनके पद के लिए संभावित अनुचितता के रूप में देखा था। ये दो कारण जल्दी बुलाने की वजह लग रहे हैं। हालांकि, सरकार की ओर से कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए ये सिर्फ कयास हो सकते हैं। 

IMF की बैठक 9 मई को होगी 

सुब्रमण्यन की यह विदाई 9 मई को आईएमएफ की बैठक से पहले हो गई है। 9 मई को आईएमएफ की अहम बैठक होने वाली थी, जिसमें पा​किस्तान को अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर फैसला होने वाला था। माना जा रहा है कि आतंकवादी गतिविधियों में पाकिस्तान की संलिप्ता के कराण भारत पाकिस्तान को और वित्तीय सहायता देने का विरोध करेगा। पाकिस्तान पहले से इस मुद्दे को उठा रहा है। वहीं, सुब्रमण्यन को अचानक से बुलाने के फैसले के बाद से  रणनीतिक और राजनीतिक वजहों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। 

 

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