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युद्ध, महंगाई और कमजोर GDP ग्रोथ: RBI की चिंताजनक रिपोर्ट के बीच सरकार का विदेशी निवेशकों को बड़ा टैक्स गिफ्ट

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jun 05, 2026 11:12 am IST,  Updated : Jun 05, 2026 11:56 am IST

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, बढ़ती महंगाई और कमजोर पड़ती विकास दर को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने चिंता जताई है। इसी बीच केंद्र सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।

सरकार ने विदेशी...- India TV Hindi
सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए खोला खजाना

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक साथ कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, बढ़ती महंगाई, महंगा होता कच्चा तेल और कमजोर पड़ती वैश्विक मांग ने चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान घटा दिया है और महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया है। हालांकि सरकार ने विदेशी निवेशकों को बड़ा टैक्स लाभ देकर अर्थव्यवस्था में कैपिटल फ्लो बढ़ाने की कोशिश की है।

आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने घोषणा की है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को सरकारी बॉन्ड (G-Secs) पर मिलने वाले ब्याज और बिक्री से होने वाली आय पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट दी जाएगी। अब तक विदेशी निवेशकों को 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स और सरकारी बॉन्ड के ब्याज पर 20% टैक्स देना पड़ता था। नई सिस्टम से भारत के बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

रुपये और बाजार को मिलेगा सहारा?

सरकार का मानना है कि इस फैसले से भारत में स्थिर विदेशी पूंजी आएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब रुपये पर दबाव बना हुआ है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखने को मिल रही है। बता दें कि यदि विदेशी निवेश बढ़ता है तो इससे रुपये को मजबूती मिल सकती है और सरकारी उधारी की लागत भी कम हो सकती है।

GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊंची ऊर्जा कीमतें, सप्लाई चेन में रुकावट और मौसम संबंधी जोखिम आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकते हैं। RBI के मुताबिक, FY27 की पहली तिमाही में विकास दर 6.6%, दूसरी तिमाही में 6.3%, तीसरी में 6.5% और चौथी तिमाही में 6.8% रहने का अनुमान है। हालांकि RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि निजी खपत, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टरर के निर्यात के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी मजबूती दिखा रही है।

महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता

आरबीआई ने महंगाई के मोर्चे पर भी सतर्कता दिखाई है। केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा लागत में उछाल और मौसम से जुड़े जोखिम महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारण बताए गए हैं। आरबीआई का अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई 5.9% तक पहुंच सकती है, जो उसके निर्धारित लक्ष्य के ऊपरी स्तर के करीब है। इसके अलावा, एल नीनो और सामान्य से कमजोर मानसून की आशंका को भी केंद्रीय बैंक ने प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। यदि बारिश कम होती है, तो खाने-पीने वाली चीजों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है।

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

आरबीआई ने फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा है, लेकिन साफ संकेत दिया है कि वह महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले महीनों में युद्ध, तेल की कीमतें और मानसून की स्थिति तय करेगी कि भारत की अर्थव्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल सरकार और आरबीआई दोनों के सामने विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।

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