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आजाद भारत का पहला बजट किसने और कब पेश किया था, कितने रुपये का किया गया था प्रावधान, क्या थीं प्राथमिकताएं

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Feb 01, 2026 06:11 am IST,  Updated : Feb 01, 2026 06:50 am IST

आजाद भारत का पहला बजट देश के बंटवारे के कारण बड़े पैमाने पर हुए दंगों के बीच पेश किया गया था। उस समय भारत की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी।

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कब और किसने पेश किया था आजाद भारत का पहला बजट Image Source : PTI

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज, 1 फरवरी को लगातार 9वां बजट पेश करने जा रही हैं। वैश्विक अनिश्चितता के बीच पेश होने वाले इस बजट में आर्थिक वृद्धि को गति देने के उद्देश्य से सुधारवादी उपायों के होने की उम्मीद है। देश की आम जनता से लेकर बड़े-बड़े उद्योगपति भी इस बजट से काफी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। आज हम यहां आजाद भारत के पहले बजट के बारे में जानेंगे। यहां हम जानेंगे कि आजाद भारत का पहला बजट किसने और कब पेश किया था? इसके साथ ही, हम ये भी जानेंगे कि आजाद भारत के पहले बजट में कितने रुपये का प्रावधान था और उस समय बजट में क्या प्राथमिकताएं थीं।

कब और किसने पेश किया था आजाद भारत का पहला बजट

आजाद भारत का पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था। आजादी के बाद, भारत का पहला बजट 26 नवंबर, 1947 को पेश किया गया था। आजाद भारत का पहला बजट देश के बंटवारे के कारण बड़े पैमाने पर हुए दंगों के बीच पेश किया गया था। उस समय भारत की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी। पहले बजट में ही ये तय किया गया था कि भारत और पाकिस्तान सितंबर 1948 तक एक ही करेंसी का इस्तेमाल करेंगे। आजाद भारत का पहला बजट साढ़े सात महीने की अवधि के लिए था, जिसके बाद अगला बजट 1 अप्रैल, 1948 से लागू होना था। 

पहले बजट में क्या थीं देश की प्राथमिकताएं 

आजाद भारत के पहले बजट में मात्र 171.15 करोड़ रुपये का प्रावधान था। उस समय, बंटवारे के बाद देश के हालातों को सुधारने पर पूरा फोकस था, जो बेहद बुरे समय से गुजर रहा था। पहले बजट से जुड़े आंकड़ों की बात करें तो देश की कुल आय 171.15 करोड़ रुपये, कुल खर्च 197.29 करोड़ रुपये था। हालांकि, कुछ रिकॉर्ड में ये 197.39 करोड़ रुपये भी दर्ज है। उस समय भारत का रक्षा बजट 92.74 करोड़ रुपये था, जबकि देश का राजकोषीय घाटा 24.59 करोड़ रुपये था। आजादी मिलने के बाद देश के कुल खर्च का करीब 46-50 प्रतिशत हिस्सा रक्षा के लिए खर्च किया गया था, क्योंकि देश को अपनी नई सीमाओं और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को मजबूत बनाना था।

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