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Gensol Engineering पर चला सेबी का चाबुक, कंपनी का शेयर इतना लुढ़ककर लोअर सर्किट लिमिट पर पहुंचा

 Published : Apr 16, 2025 04:00 pm IST,  Updated : May 28, 2025 02:40 pm IST

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने अनमोल और पुनीत सिंह जग्गी पर लगे आरोपों के बाद अगले आदेश तक जेनसोल में निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक के पद से दूर रहने का भी आदेश दिया है।

जेनसोल इंजीनियरिंग के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनमोल सिंह जग्गी और पूर्णकालिक डायरेक्टर पुनीत सिंह - India TV Hindi
जेनसोल इंजीनियरिंग के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनमोल सिंह जग्गी और पूर्णकालिक डायरेक्टर पुनीत सिंह जग्गी। Image Source : GENSOL ENGINEERING

जेनसोल इंजीनियरिंग के शेयर को बुधवार को तगड़ा झटका लगा। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कंपनी के फर्म और इसके प्रमोटरों अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी पर लगे आरोपों के बाद अगले आदेश तक प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया, जिससे कंपनी का शेयर  5 प्रतिशत लुढ़क गया और यह लोअर सर्किट की लिमिट पर पहुंच गया। पीटीआई की खबर के मुताबिक, बीएसई पर शेयर 4.99 प्रतिशत गिरकर 123.65 रुपये पर आ गया, जो निचली सर्किट सीमा है। एनएसई पर कंपनी के शेयर 5 प्रतिशत गिरकर 122.68 रुपये पर आ गए, जो दिन के लिए सबसे कम ट्रेडिंग की अनुमति वाली लिमिट है।

सेबी ने यह बैन भी लगाया है

खबर के मुताबिक, बाजार नियामक सेबी ने फंड डायवर्जन और गवर्नेंस लैप्स के लगे आरोपों के मामले में जेनसोल इंजीनियरिंग के प्रमोटर्स पर यह बैन लगाया है। इतना ही नहीं, मार्केट रेगुलेटर ने अनमोल और पुनीत सिंह जग्गी को अगले आदेश तक जेनसोल में निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक के पद से दूर रहने का भी आदेश दिया है।

साथ ही सेबी ने जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड (जीईएल) को उसके द्वारा घोषित स्टॉक विभाजन को रोकने का निर्देश दिया। यह आदेश जून 2024 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को शेयर मूल्य में हेरफेर और जीईएल से धन के डायवर्जन से जुड़ी शिकायत के मिलने के बाद आया और उसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।

सभी को गुमराह करने का प्रयास करे का आरोप

सेबी ने बीते मंगलवार को 29 पेज के अंतरिम आदेश में कहा कि पहली नजर में निष्कर्षों से पता चला है कि कंपनी (जीईएल) के प्रवर्तक निदेशकों अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी द्वारा धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से धन का दुरुपयोग और डायवर्जन किया गया है। आरोप है कि ये डायवर्ट किए गए धन के प्रत्यक्ष लाभार्थी भी हैं। नियामक ने कहा कि कंपनी ने अपने ऋणदाताओं द्वारा कथित रूप से जारी किए गए जाली आचरण पत्र प्रस्तुत करके सेबी, सीआरए (क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों), ऋणदाताओं और निवेशकों को गुमराह करने का प्रयास किया है।

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