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क्या पापा की प्रॉपर्टी पर दावा ठोक सकती हैं शादीशुदा बेटियां, जानें क्या कहता है कानून

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Nov 20, 2024 04:04 pm IST,  Updated : Nov 20, 2024 04:04 pm IST

सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के मुताबिक हिंदू धर्म में पैदा होने वाली लड़की अपने जन्म के साथ ही अपने पापा की प्रॉपर्टी में बराबरी की हिस्सेदारी होती है। ये नियम हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध, सिख, जैन समाज के लिए भी लागू होता है।

पापा की प्रॉपर्टी पर बेटियों के हक को लेकर क्या है कानून- India TV Hindi
पापा की प्रॉपर्टी पर बेटियों के हक को लेकर क्या है कानून Image Source : FREEPIK

समाज का एक वर्ग आज भी भारत को पुरुष प्रधान देश ही मानता है। देश का एक आम परिवार भी सदियों पहले से चलती आ रही इस परंपरा को फॉलो कर रहा है। आमतौर पर एक सामान्य परिवार में देखने को मिलता है कि पिता की प्रॉपर्टी पर बेटों का ही हक होता है। सदियों से ऐसा ही देखने को मिल रहा है कि पिता की प्रॉपर्टी को बेटों के बीच ही बांटा जाता है जबकि बेटियों को पिता की प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं मिलता है। लेकिन देश का कानून इस परंपरा पर जरा-भी विश्वास नहीं करता है। आज हम यहां जानेंगे कि क्या शादीशुदा बेटियां अपने पिता की संपत्ति पर दावा ठोक सकती हैं?

पापा की प्रॉपर्टी पर बेटियों के हक को लेकर क्या है कानून

भारतीय संविधान के हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के मुताबिक, एक पिता की प्रॉपर्टी पर बेटियों का भी उतना ही हक और अधिकार होता है, जितना बेटों का होता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटी कुंवारी है या शादीशुदा। इसका सीधा मतलब ये हुआ कि शादीशुदा बेटियां भी अपने पिता की प्रॉपर्टी पर बराबरी की हिस्सेदारी के लिए दावा ठोक सकती हैं। अगर किसी व्यक्ति का एक बेटा और एक बेटी है तो ऐसे में बेटी अपने पापा की आधी प्रॉपर्टी यानी प्रॉपर्टी में अपने भाई के बराबर की हिस्सेदारी के लिए दावा कर सकती है।

अगर ऐसा हुआ को पापा की प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती बेटियां

लेकिन इस मामले में एक परिस्थिति ऐसी भी है कि जहां बेटी अपने पापा की प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती है। कानून के हिसाब से अगर कोई व्यक्ति अपनी मृत्यु से पहले वसीयत में बेटी का नाम शामिल नहीं करता है तो ऐसी स्थिति में बेटी अपने पापा की प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के मुताबिक हिंदू धर्म में पैदा होने वाली लड़की अपने जन्म के साथ ही अपने पापा की प्रॉपर्टी में बराबरी की हिस्सेदारी होती है। ये नियम हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध, सिख, जैन समाज के लिए भी लागू होता है।

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