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पंजाब सरकार का फैसला, डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल के 7 साथियों के खिलाफ NSA एक्सटेंड नहीं करेगी

 Reported By: Puneet Pareenja, Edited By: Malaika Imam
 Published : Mar 16, 2025 01:47 pm IST,  Updated : Mar 16, 2025 02:09 pm IST

पंजाब सरकार ने NSA के तहत डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल के 7 साथियों के खिलाफ NSA की अवधि नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है। ये सभी आरोपी अजनाला थाने पर हुए हमले के आरोपी हैं।

भगवंत मान- India TV Hindi
भगवंत मान Image Source : PTI

सूत्रों के हवाले से खबर है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल के 7 साथियों के खिलाफ पंजाब सरकार NSA की अवधि नहीं बढ़ाएगी। ये सभी आरोपी अजनाला थाने पर हुए हमले के आरोपी हैं। पंजाब सरकार इस मामले में अब इन पर मुकदमा चलाना चाहती है। सूत्रों के अनुसार, इन सातों आरोपियों को पंजाब लाकर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा। वहीं, अमृतपाल और उसके अन्य दो साथियों को लेकर अभी तक पंजाब सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है।

अमृतपाल सिंह की छुट्टी

वहीं, बीते दिनों पंजाब की खडूर साहिब सीट से सांसद अमृतपाल सिंह को लेकर केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जानकारी दी थी कि जेल में बंद सांसद को 54 दिनों की छुट्टी दी गई है। यह जानकारी चीफ जस्टिस शील नागु और जस्टिस सुमीत गोयल की खंडपीठ के समक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सतपाल जैन ने लोकसभा सचिवालय द्वारा 11 मार्च को जारी पत्र पेश करते हुए दी गई थी।

इस पत्र के माध्यम से बताया गया कि अमृतपाल सिंह को 24 जून, 2024 से 2 जुलाई, 2024 तक 22 जुलाई से 2024 से 9 अगस्त, 2024 तक और 25 नवंबर, 2024 से 20 दिसंबर 2024 तक अनुपस्थिति की अनुमति दी गई है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को संसद से निष्कासन की आशंका थी, लेकिन इस पत्र से उसकी चिंता दूर हो जाती है।

अमृतपाल सिंह ने अपनी याचिका में सांसद निधि से जुड़े स्थानीय विकास कार्यों के लिए अधिकारियों और मंत्रियों से मिलने की अनुमति मांगी थी जिस पर खंडपीठ ने कहा कि संसद की कार्यवाही कुछ निश्चित नियमों के तहत चलती है, इसलिए उचित होगा कि याचिकाकर्ता इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को आवेदन दे।

डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल में बंद है अमृतपाल

अमृतपाल सिंह, वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख भी है। वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल में बंद है। उसने अपनी याचिका में लोकसभा सत्र में भाग लेने की अनुमति मांगी थी। उसका कहना था कि उसकी  लगातार अनुपस्थिति उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और उनके क्षेत्र की जनता बिना प्रतिनिधित्व के रह रही है। उसने यह भी तर्क दिया कि यदि उसकी अनुपस्थिति 60 दिनों से अधिक हो जाती है तो उनकी सीट खाली घोषित की जा सकती है, जिससे लगभग 19 लाख मतदाताओं पर प्रभाव पड़ेगा।

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